बिजनेस

Zoho Success Story: न विदेशी फंडिंग, न वेंचर कैपिटल; श्रीधर वेम्बू ने कैसे खड़ी ₹1 लाख करोड़ की कंपनी?

स्टार्टअप जब एक-एक कदम आगे बढ़ाने के लिए विदेशी फंडिंग को तरसते रहते हैं। उस दौर में Zoho ने विदेशी फंडिंग से एक भी रुपया लिए बिना 1 लाख करोड़ रुपये की कंपनी खड़ी कर दी है।

Image

बिना विदेशी निवेश के कामयाब हुई जोहो

Zoho Success Story : भारतीय शेयर बाजार से जब लगातार विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैंं। स्टार्टअप्स विदेशी एंजल इन्वेस्टर्स और वेंचर कैपिटल के तरस रहे हैं। क्योंकि, देश में किसी भी स्टार्टअप की कामयाबी को उसे मिलने वाली विदेशी फंडिंग से जोड़कर देखा जाता है। अक्सर देश के एंजल इन्वेस्टर और वेंचर कैपिटल भी स्टार्टअप्स में तभी निवेश करते हैं, जब देखते हैं कि विदेशी निवेशक रुचि ले रहे हैं।

क्यों सबसे अलग है Zoho?

विदेशी फंडिंग की निर्भरता के इस दौर में Zoho देश के पूरे स्टार्टअप और कॉर्पोरेट इकोसिस्टम के मिसाल पेश की है। क्योंकि, भारत में स्टार्टअप जब शुरू होते हैं, तो पहला सवाल अक्सर यही होता है कि फंडिंग कब मिलेगी, लेकिन श्रीधर वेंम्बू ने करीब 30 साल पहले तय कर लिया था कि वह अपनी कंपनी के लिए न विदेशी निवेश लेगा और न ही वेंचर कैपिटल के भरोसे कारोबार बढ़ाएगा। आज उसी फैसले का नतीजा है कि Zoho बिना विदेशी फंडिंग के भी कामयाब हो पाई।

देश की सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड कंपनियों में शामिल

Burgundy Private Hurun India 500 रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की अनुमानित वैल्यू करीब ₹1.04 लाख करोड़ (12.5 अरब डॉलर) है। इस तरह कंपनी देश की सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड कंपनियों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 में Zoho ने ₹12,313 करोड़ का रेवेन्यू और ₹3,191 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया है। यह दिखाता है कि बिना बाहरी फंडिंग के भी एक टेक कंपनी लगातार मुनाफे के साथ तेजी से बढ़ सकती है।

एक फैसले ने बदल दी दिशा

श्रीधर वेम्बू ने 1996 में अपने साथियों के साथ AdventNet की शुरुआत की। बाद में यही कंपनी Zoho Corporation बनी। उस दौर में दुनिया भर में वेंचर कैपिटल का दौर था, लेकिन वेम्बू ने साफ फैसला किया कि कंपनी का विस्तार ग्राहकों से होने वाली कमाई के दम पर होगा, किसी बाहरी निवेश के सहारे नहीं। यही रणनीति Zoho की सबसे बड़ी ताकत बन गई। कंपनी ने हर साल अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा नए प्रोडक्ट, रिसर्च और तकनीक पर खर्च किया। आज Zoho के पास 55 से ज्यादा क्लाउड आधारित बिजनेस एप्लिकेशन हैं, जिनमें Zoho CRM, Zoho Books, Zoho Mail और Zoho One जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। कंपनी दुनिया भर के छोटे कारोबार से लेकर बड़ी कंपनियों तक को सॉफ्टवेयर सेवाएं देती है।

बिजनेस मॉडल नहीं फिलोसफी के लेवल पर भी अलग

Zoho की पहचान सिर्फ उसके बिजनेस मॉडल से नहीं, बल्कि उसके पीछे की दार्शनिक सोच से भी अलग है। श्रीधर वेम्बू ने बड़े शहरों के बजाय तमिलनाडु के छोटे शहरों और गांवों में इंजीनियरिंग टैलेंट तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने Zoho Schools of Learning शुरू किया, जहां युवाओं को बिना महंगी डिग्री के तकनीकी प्रशिक्षण देकर नौकरी के लिए तैयार किया जाता है। उनका मानना है कि प्रतिभा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। Zoho की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि हर सफल स्टार्टअप की शुरुआत निवेशकों के पैसे से नहीं, बल्कि एक मजबूत विचार, अनुशासन और ग्राहकों की समस्या हल करने की क्षमता से होती है।

तोड़ा सिलिकॉन वैली का मिथ

कोविड के बाद वेम्बू खुद भी गांव से काम करने लगे और उन्होंने साबित किया कि वैश्विक स्तर की टेक कंपनी चलाने के लिए सिलिकॉन वैली या किसी महानगर में बैठना जरूरी नहीं है। आज Zoho के 150 से अधिक देशों में 15 करोड़ से ज्यादा यूजर और 10 लाख से अधिक भुगतान करने वाले ग्राहक हैं। Zoho की सफलता उन उद्यमियों के लिए बड़ी सीख है जो मानते हैं कि बड़ी कंपनी बनाने के लिए भारी-भरकम फंडिंग जरूरी होती है। श्रीधर वेम्बू ने दिखाया कि मजबूत प्रोडक्ट, ग्राहकों का भरोसा, लगातार नवाचार और लंबी अवधि की सोच के दम पर भी वैश्विक स्तर की कंपनी खड़ी की जा सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article