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Bharat Jodo Yatra: कांग्रेस ने भेजा अखिलेश मायावती को 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल होने का न्योता

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 2, 2023, 10:39 PM IST

Bharat Jodo Yatra: बीजेपी को पराजित करना बड़ा लक्ष्य है और बिना उत्तर प्रदेश को साथ लिए देश की सबसे बड़ी पार्टी का मुकाबला करना आसान नहीं हैं। सो अब बाकी विपक्षियों को भी साथ लेने की कवायद शुरू हो गई है ।

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आम चुनावों में बात यूपी की दहलीज से आगे चली जाती है

Photo : BCCL

मनोज यादव की रिपोर्ट

आम चुनावों की आमद में अभी डेढ़ साल का समय शेष है लेकिन उत्तर प्रदेश में सियासी चौसर बिछना शुरू हो गई है । कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा (

Bharat Jodo Yatra) के जरिए सालो से नाराज चल रहे उत्तर प्रदेश को खुद के साथ जोड़ने की मुहिम पर निकली है आज राहुल गांधी ने बीएसपी मुखिया मायावती (Mayawati) और सपा नेता अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) को पत्र लिखकर भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने का न्योता दिया है, अखिलेश और मायावती ने न्योते का धन्यवाद तो दे दिया लेकिन यात्रा में दोनों नेताओं की मौजूदगी रहेगी.....या नही इसको लेकर रुख साफ नहीं किया है।

दरअसल यूपी की सियासत अपने अलग रंग और ढंग में आगे बढ़ती है अखिलेश यादव विधानसभा चुनावों में एकला चलो का नारा बुलंद कर रहे थे लेकिन आम चुनावों की तस्वीर दूसरी है । यूपी में सपा के मुस्लिम तबके से रिश्ते अच्छे है और विधानसभा चुनावों में इसी रिश्ते के बदौलत इस बार सपा 100 के आंकड़े को पार कर पाई थी.....।

'मुस्लिम कांग्रेस पर भरोसा करता आया है'

आम चुनावों में बात यूपी की दहलीज से आगे चली जाती है और लोकसभा चुनावो के इतिहास को उठाकर देखे तो मुस्लिम कांग्रेस पर भरोसा करता आया है । मुश्किल सपा के सामने है कि इस बार अगर चुनावी राह पर अकेले निकले तो मुस्लिम तबके को कैसे साथ बनाए रखा जाए । गाए बगाहे मुस्लिमो की अनदेखी के मामले में बीएसपी भी सपा पर तोहमत जड़ कर अपने तराने छेड़ देती है ।

कांग्रेस और बीएसपी के अलावा अब तो रामपुर और आजमगढ़ के पसमांदा मुसलमानो का भरोसा जीतकर...बीजेपी में मुस्लिम तबके के खुद पर गुस्से को खत्म कर नए विकल्प के रूप में दावा पेश कर दिया है ।केवल सपा ही नही इस बार के चुनावों में कांग्रेस, बीएसपी सबके सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है । लगातार मिल रही हार से ये दल सियासी संकट से जूझ रहे है । सो बीजेपी को हराने के एजेंडे के साथ ही खुद की सियासत को साधना भी बड़ी चुनौती है ।

क्या 2019 की तरह 2024में भी महागठबंधन बनाने की हो रही कवायद ?

बीएसपी में बहुत ज्यादा संभावनाएं नजर नहीं आ रही ... यूं तो विपक्ष सड़को पर संघर्ष करते दिख नही रहा और सपा कांग्रेस कुछ कर भी रही है लेकिन बीएसपी की गिनती थोड़े बहुत में भी नही हैं। ऐसे में बीएसपी की संभावनाएं सिकुड़ती जा रही हैं। कांग्रेस का गठबंधन को लेकर नरम रुख रहा है लेकिन कांग्रेस का यूपी में कोई आधार न होने के चलते क्षेत्रीय दल उसके साथ तालमेल कर उसकी जड़ों को मजबूत नही करना चाहते है ।

अखिलेश यादव कह भी चुके है बीजेपी और कांग्रेस के रुख में बहुत ज्यादा अंतर नही है। हालांकि सपा के अंदर से आवाजे उठने लगी है पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि बीजेपी को हराने के लिए जरूरी है कि सभी पार्टियां एक साथ लामबंद हो । मायावती से लेकर राहुल गांधी को एक साथ आना चाहिए ।

हालांकि सियासत में संभावनाएं भी माहोल के हिसाब से बदलती रहती है ....अभी आम चुनावों में लंबा समय है और लड़ाई कैसे लड़ी जाएगी ये भी रणनीति का हिस्सा होती है । लेकिन इतना तय है कि इस बार तैयारियो के लिहाज से जरूर माहोल ठंडा लग रहा हो लेकिन चुनाव बहुत दिलचस्प होगा।

टाइम्स नाउ नवभारत
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