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MP के चुनावी रण में प्रियंका: हाथों में माला, नर्मदा नदी पर पूजा और आदिवासी वोटबैंक पर नजर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 02:48 PM IST

MP Election 2023: महाकोशल क्षेत्र का जबलपुर ऐसा केंद्र है, जहां आदिवासी मतदाता बहुत ज्यादा संख्या में है। आठ जिलों वाले इस संभाग में अनुसूचित जनजाति के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें पिछले साल 11 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस इस आदिवासी वोटबैंक को अपने हाथ से छिटकने नहीं देना चाहती है।

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प्रियंका गांधी

Photo : Twitter

MP Election 2023: हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जीतने के बाद कांग्रेस की नजर अब मध्य प्रदेश पर है। यहां साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस ने राज्य में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत आज से कर दी है। चुनावी अभियान की बागड़ोर खुद प्रियंका गांधी ने संभाली है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी ने जोर-शोर से पार्टी का प्रचार किया था।

कांग्रेस ने अपनी चुनावी अभियान के लिए जबलपुर को चुना है। सोमवार सुबह कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने जबलपुर स्थित ग्वारीघाट पर नर्मदा नदी की पूजा अर्चना की। दौरान प्रियंका गांधी बिल्कुल बदली हुई नजर आईं। हाथों में माला लिए वह भक्ति भाव में डूबी हुई दिखीं। मां नर्मदा की आरती के बाद उन्होंने चुनावी अभियान की शुरुआत की।

आदिवासी वोटबैंक पर नजर

नर्मदा नदी पर आरती के बाद प्रियंका गांधी जबलपुर में एक रैली को भी संबोधित करेंगी। अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश करने के पीछे कांग्रेस का पारंपरिक आदिवासी वोटबैंक है। पार्टी के एक नेता का कहना है कि महाकोशल क्षेत्र का जबलपुर ऐसा केंद्र है, जहां आदिवासी मतदाता बहुत ज्यादा संख्या में है। आठ जिलों वाले इस संभाग में अनुसूचित जनजाति के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें पिछले साल 11 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बताया, कांग्रेस इस सफलता को फिर से दोहराना चाहती है और आदिवासी वोटबैंक को अपने हाथ से छिटकने नहीं देना चाहती है।

38 सीटों को साधना चाहती है कांग्रेस

मध्य प्रदेश में पिछले साल कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन कर सरकार बनाई थी। हालांकि, बाद में कुछ विधायकों की बगावत के कारण सरकार गिर गई। ऐसे में कांग्रेस को डर है कि जबलपुर समेत महाकोशल क्षेत्र में पार्टी कमजोर न पड़ जाए। दरअसल, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी इस क्षेत्र से होकर नहीं गुजरी थी, यही कारण है कि कांग्रेस इस क्षेत्र में पूरा दमखम लगाना चाहती है। महाकोशल क्षेत्र में रैली से पड़ोसी विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में कांग्रेस को मदद मिलेगी। महाकोशल या जबलपुर संभाग में जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और छिंदवाड़ा जिले शामिल हैं और इसमें 38 विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इनमें से 24 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा 13 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी।

प्रियंका ने बोला करारा हमला

जबलपुर में एक रैली से शुरुआत करते हुए प्रियंका गांधी ने शिवराज सिंह चौहान सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और नौकरियां उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने व्यापमं, राशन वितरण में कथित भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के 220 महीनों के शासन में 225 घोटाले हुए हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा, पिछले तीन वर्षों में भाजपा सरकार द्वारा राज्य में केवल 21 सरकारी नौकरियां प्रदान की गईं। जब यह आंकड़ा मेरे संज्ञान में लाया गया, तो मैंने अपने कार्यालय से तीन बार इसकी जांच करने को कहा और पाया कि यह एक तथ्य है। इस दौरान कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने के बाद केंद्रीय मंत्री बने ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लिए बिना प्रियंका ने उन पर कटाक्ष किया और कहा कि मध्य प्रदेश में कुछ नेताओं ने सत्ता के लिए पार्टी की विचारधारा को त्याग दिया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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