मालेगांव ब्लास्ट मामले में लंबी कानूनी लड़ाई जीतने वाले कर्नल श्रीकांत पुरोहित के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से इस बात की जानकारी दी है कि भारतीय सेना ने कर्नल पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर प्रमोशन के लिए मंजूरी दे दी है।
सेवानिवृत्ति पर रोक और प्रमोशन
कर्नल पुरोहित का सैन्य करियर 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाला था, लेकिन सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी। यदि कर्नल पुरोहित ब्रिगेडियर के रूप में कार्यभार संभालते हैं, तो उनका सेवाकाल बढ़ सकता है।
लंबी कानूनी जंग और सम्मान की वापसी
कर्नल श्रीकांत पुरोहित का मामला भारतीय सेना के इतिहास के सबसे विवादित अध्यायों में से एक रहा है। 2008 में उनकी गिरफ्तारी किसी आतंकी मामले में किसी कार्यरत सैन्य अधिकारी की पहली गिरफ्तारी थी। इसी दौर में 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्द राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने थे। 31 जुलाई 2025 को विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने उन्हें और अन्य छह आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता और अभियोजन पक्ष कोई भी ठोस सबूत पेश करने में सफल नहीं रहा। बरी होने के तुरंत बाद, पिछले साल सितंबर में उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल से प्रमोट कर 'कर्नल' बनाया गया था। अब ब्रिगेडियर के पद पर उनकी पदोन्नति उनके पेशेवर सम्मान को पूरी तरह बहाल करने की दिशा में सेना का बड़ा संदेश है।
विवाद और 'भगवा आतंकवाद' का नैरेटिव
कर्नल पुरोहित ने हमेशा यह तर्क दिया कि वे मालेगांव मामले के दौरान सेना की इंटेलिजेंस यूनिट के लिए काम कर रहे थे और वे केवल अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। उनकी गिरफ्तारी और 9 साल जेल में बिताने के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। अब उनकी पदोन्नति को उन लोगों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है जो उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार मानते थे।
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