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JNU में फिर टकराव: दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन के समय बवाल, ABVP का आरोप- मारपीट हुई, जूते-चप्पल दिखाए गए

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र संगठनों (आइसा, एसएफआई, डीएसएफ) ने जुलूस में शामिल छात्रों से मारपीट की और उन्हें जूते-चप्पल दिखाकर अपमानित किया। एबीवीपी का कहना है कि लेफ्ट ने जानबूझकर विसर्जन के रास्ते में अपना "effigy burning" कार्यक्रम शिफ्ट किया

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जेएनयू में फिर मचा बवाल

Photo : Times Now Digital

Vijaya Dasami 2025: अक्टूबर की शाम जेएनयू में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान बवाल हो गया। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र संगठनों (आइसा, एसएफआई, डीएसएफ) ने जुलूस में शामिल छात्रों से मारपीट की और उन्हें जूते-चप्पल दिखाकर अपमानित किया। एबीवीपी का कहना है कि लेफ्ट ने जानबूझकर विसर्जन के रास्ते में अपना "effigy burning" कार्यक्रम शिफ्ट किया ताकि टकराव हो।

JNUSU ने खारिज किए आरोप

वहीं, जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उनका कहना है कि एबीवीपी ने रावण दहन में उमर खालिद और शरजील इमाम को रावण बनाकर जलाने की कोशिश की, जो इस्लामोफोबिया और नफरत फैलाने की कोशिश है। दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया है और कैंपस में माहौल गरमाया हुआ है। मामला अब धर्म, राजनीति और विचारधारा की टकराहट का रूप ले चुका है।

दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर वैचारिक और धार्मिक टकराव की घटनाओं को लेकर चर्चा में है। दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी के बीच जोरदार टकराव हुआ, जिसमें एबीवीपी ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

एबीवीपी के आरोप: "हमले की योजना बनाकर की गई बदसलूकी, जूते-चप्पल दिखाए गए।

क्या है पूरा मामला?

एबीवीपी का दावा है कि 2 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे, जब दुर्गा पूजा विसर्जन यात्रा साबरमती टी-पॉइंट के पास पहुंची, तभी आइसा, एसएफआई और डीएसएफ जैसे वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने न केवल यात्रा को बाधित किया, बल्कि जुलूस में शामिल छात्रों से मारपीट की और जूते-चप्पल दिखाए।

एबीवीपी ने इसे जानबूझकर की गई साजिश बताया और कहा कि लेफ्ट संगठनों ने पहले अपना 'effigy burning' कार्यक्रम बराक हॉस्टल पर रखने की बात कही थी, लेकिन अचानक अंतिम समय में उसे टी-पॉइंट पर शिफ्ट कर दिया गया ठीक उसी समय जब दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन जुलूस वहां से गुजर रहा था।

एबीवीपी के अनुसार, यह एक सुनियोजित प्रयास था ताकि धार्मिक आयोजन को बाधित किया जा सके और हिंसा भड़काई जाए। संगठन ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी वामपंथी छात्र ‘महिषासुर दिवस’ जैसे नारों के ज़रिए हिंदू त्योहारों का अपमान कर चुके हैं।

'नफ़रत की राजनीति कर रही है एबीवीपी'

वहीं, जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और एबीवीपी पर ही उलटे धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। छात्र संघ के अध्यक्ष नीतिश, उपाध्यक्ष मनीषा और महासचिव मुन्तेहा के बयान में कहा गया है कि एबीवीपी जेएनयू में नफरत फैलाने और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने बताया कि एबीवीपी ने 2 अक्टूबर महात्मा गांधी की जयंती के दिन ‘रावण दहन’ का आयोजन किया, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को रावण के रूप में जलाने की योजना बनाई गई थी। छात्र संघ ने सवाल उठाया कि जब ये दोनों छात्र अभी भी ट्रायल में हैं, तो उन्हें प्रतीकात्मक रूप से जलाना न्याय प्रक्रिया का मखौल उड़ाना नहीं तो और क्या है।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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