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Ganesh Chaturthi 2026: केवल मोदक ही नहीं, गणपति बप्पा को लगता है इन 7 पारंपरिक चीजों का भी भोग

इस बार बप्पा के स्वागत में उकडीचे मोदक के साथ-साथ इन पारंपरिक व्यंजनों को भी अपनी भोग थाली में शामिल करें और त्योहार की खुशियों को दोगुना करें।

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गणपति बप्पा का खूब पसंद आते हैं ये पारंपरिक प्रसाद (Photo: iStock)

गणेश चतुर्थी का त्योहार आ चुका है। बप्पा के स्वागत की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। गणपति उत्सव और स्वाद का गहरा नाता है। जब भी बप्पा के पसंदीदा प्रसाद की बात आती है, तो सबसे पहले जुबां पर 'उकडीचे मोदक' का नाम आता है। हालांकि, भारत के अलग-अलग प्रांतों में गणेश उत्सव के दौरान बप्पा को कई अन्य पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग भी लगाया जाता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 7 अनोखे और पारंपरिक भोग के बारे में।

कडुबू (कर्नाटक)

कर्नाटक में गणेश चतुर्थी के अवसर पर 'कडुबू' विशेष रूप से तैयार किया जाता है। यह दिखने में गुजिया जैसा होता है। चावल या मैदे के आटे की बाहरी परत के अंदर कसा हुआ ताजा नारियल, गुड़ और इलायची का मिश्रण भरा जाता है। इसे भाप में पकाकर या तेल में तलकर बप्पा को अर्पित किया जाता है।

कुडुमुलु (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना)

दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बप्पा को 'कुडुमुलु' का भोग लगाया जाता है। चावल के आटे में कद्दूकस किया हुआ नारियल, गुड़ और थोड़ा सा देसी घी मिलाकर इसके छोटे-छोटे लड्डू या रोल बनाए जाते हैं और भाप में पकाया जाता है। यह प्रसाद पचने में हल्का और बेहद पौष्टिक होता है।

पंचखाद्य (महाराष्ट्र और गोवा)

गणपति पूजा में 'पंचखाद्य' का भोग बहुत पवित्र माना जाता है। यह पांच खास सामग्रियों- सूखा नारियल, खसखस, गुड़ या खड़ी शक्कर, भुने हुए चने और काजू-बादाम को मिलाकर बनाया जाता है। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और यह बप्पा के प्रिय महाप्रसाद में शामिल है।

पाथोली (कोंकण क्षेत्र)

कोंकण और तटीय इलाकों में गणेशोत्सव के दौरान 'पाथोली' बनाने की अनूठी परंपरा है। इसमें चावल के घोल को हल्दी के पत्तों पर फैलाया जाता है, फिर उसके बीच में नारियल और गुड़ की स्टफिंग भरकर पत्तों को मोड़ दिया जाता है। भाप में पकने के बाद हल्दी के पत्तों की सोंधी खुशबू इस मिठाई के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है।

सुन्दल (तमिलनाडु)

तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी पर मीठे के साथ-साथ नमकीन भोग के रूप में 'सुन्दल' चढ़ाया जाता है। यह उबाले हुए सफेद चने, काले चने या मूंग से तैयार किया जाता है। इसमें राई, करी पत्ता, हरी मिर्च और ताजे कसे हुए नारियल का छौंक लगाया जाता है। यह सेहत से भरपूर और स्वादिष्ट प्रसाद है।

मोदकम और नेयप्पम (केरल)

केरल में भगवान गणेश को 'नेय्यप्पम' और चावल के आटे से बने मीठे मोदकम का भोग अर्पित किया जाता है। नेय्यप्पम को चावल के आटे, गुड़, केले और घी में तलकर बनाया जाता है। इसका क्रिस्पी बाहर का हिस्सा और नरम अंदरूनी स्वाद बप्पा के भक्तों को बेहद पसंद आता है।

पूरन पोली (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र में मोदक के अलावा 'पूरन पोली' के बिना गणेशोत्सव की थाली अधूरी मानी जाती है। उबली हुई चने की दाल और गुड़ को पीसकर बनाई गई 'पूरन' की स्टफिंग को गेहूं के आटे की रोटी में भरकर देसी घी के साथ सेका जाता है। बप्पा को चढ़ाने के बाद इसे गर्म दूध या कटाव की आमटी के साथ परोसा जाता है।

गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व आस्था के साथ ही हमारी विविध पाक-कलाका भी उत्सव है। इस बार बप्पा के स्वागत में उकडीचे मोदक के साथ-साथ इन पारंपरिक व्यंजनों को भी अपनी भोग थाली में शामिल करें और त्योहार की खुशियों को दोगुना करें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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