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Chirag Paswan hug Kangana Ranaut: चिराग पासवान ने कंगना रनौत को लगाया गले, संसद में एक-दूसरे का ऐसे किया स्वागत

Delhi News: संसद में जब चिराग पासवान और कंगना रनौत मिले तो उन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। गले लगाकर उन दोनों ने एक दूसरे का स्वागत किया। चुनावी नतीजों में चिराग ने बिहार के हाजीपुर सीट से और कंगना ने हिमाचल की मंडी सीट से जीत हासिल की है।

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चिराग पासवान और कंगना रनौत।

Chirag Paswan hug Kangana Ranaut: बॉलीवुड एक्ट्रेस और मंडी से चुनाव जीत कर संसद भवन पहुंची कंगना रनौत संसदीय दल की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हैं। जब वह शुक्रवार को संसद परिसर पहुंची तो उनकी मुलाकात अपने पुराने को-स्टार और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान से हुई। दोनों ने कैमरे के लिए जमकर पोज दिए।

'मिले ना मिले हम' फिल्म में साथ किया था काम

बता दें कि चिराग पासवान और कंगना रनौत ने 2011 में रिलीज हुई फिल्म 'मिले ना मिले हम' में साथ काम किया था। इस फिल्म में चिराग ने जहां टेनिस प्लेयर का किरदार निभाया था, वहीं कंगना सुपरमॉडल के रोल में थी। फिल्म में दोनों का रोमांटिक एंगल देखने को मिला था। बॉलीवुड इंडस्ट्री में शुरू हुई ये दोस्ती अब राजनीति के गलियारे में भी दिखी। संसद परिसर में दोनों ने गले लगाकर एक-दूसरे का स्वागत किया।

व्हाइट कुर्ते में चिराग, लाइट ग्रीन साड़ी में कंगना

लुक की बात करें तो कंगना ने लाइट ग्रीन कलर की साड़ी पहनी हुई थी और बालों को हाफ बांधा हुआ था। उन्होंने अपने लुक को सनग्लासेस से पूरा किया। वहीं चिराग व्हाइट कुर्ते में नजर आए।

दोनों के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट पर नजर डालें तो चिराग पासवान ने बिहार के हाजीपुर सीट से जीत हासिल की। उन्होंने राजद के शिवचंद्र राम को 1,70,105 वोटों के अंतर से हराया। दोनों ने ही लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया। उधर कंगना ने मंडी सीट से कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह को हराया।

(इनपुट- IANS)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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