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Operation Sindoor: 'भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान का दिया था साथ', चीन ने पहली बार कबूला सच

चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसने पिछले साल भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को रणक्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान की थी। चीन की सरकारी मीडिया ‘सीसीटीवी’ में प्रसारित एक इंटरव्यू में एवीआईसी के इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि उनकी टीम ने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की मदद की और यह सुनिश्चित किया कि चीन निर्मित J-10CE लड़ाकू विमान पूरी युद्ध क्षमता के साथ काम करें। इससे पहले भारत के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह भी दावा कर चुके थे कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य और सैटेलाइट सहायता दी थी। अब चीन के इस खुलासे को उसके हथियारों की वैश्विक बिक्री बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फाइल फोटो। AP

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Operation Sindoor: चीन ने पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि उसने पिछले साल भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को रणक्षेत्र में तकनीकी सहायता दी थी। चीन की सरकारी मीडिया ‘सीसीटीवी’ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इस खुलासे के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

चीन के सरकारी प्रसारणकर्ता ‘सीसीटीवी’ ने विमानन उद्योग निगम (AVIC) के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग का इंटरव्यू प्रसारित किया। एवीआईसी चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक को विकसित करने वाली बड़ी कंपनी मानी जाती है। हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के मुताबिक, झांग हेंग ने स्वीकार किया कि उनकी टीम ने पिछले साल मई में भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी।

पाकिस्तान के पास हैं चीन के J-10CE फाइटर जेट

पाकिस्तान वायुसेना के पास चीन निर्मित J-10CE लड़ाकू विमानों का बेड़ा मौजूद है। इन विमानों का निर्माण AVIC की सहयोगी कंपनी करती है। झांग हेंग ने कहा कि संघर्ष के दौरान उनकी टीम लगातार हवाई हमलों के सायरन और लड़ाकू विमानों की आवाज के बीच काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता था और हालात बेहद कठिन थे।

‘रणक्षेत्र में सहायता’ देने की बात कबूली

चीनी इंजीनियर ने कहा कि उनकी टीम का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि उनके उपकरण “पूरी युद्ध क्षमता” के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ J-10CE के इस्तेमाल का मामला नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” काम करने का अनुभव भी था। चीन की ओर से पहली बार इस तरह का बयान सामने आया है, क्योंकि अब तक बीजिंग लगातार पाकिस्तान को सैन्य समर्थन देने के आरोपों से इनकार करता रहा था।

भारत ने पहले ही लगाया था बड़ा आरोप

भारत के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह पहले ही दावा कर चुके हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता दी थी। उन्होंने कहा था कि चीन ने भारतीय सैन्य तैनाती की निगरानी के लिए अपने सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान को रियल टाइम जानकारी दी जा रही थी। फिक्की की एक संगोष्ठी में बोलते हुए राहुल सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान को DGMO स्तर की बातचीत के दौरान भी तत्काल जानकारी मिल रही थी।

क्या हथियार बेचने की रणनीति है यह खुलासा?

विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब अपने हथियारों की “युद्ध में सफल” छवि दिखाकर वैश्विक बाजार में बिक्री बढ़ाना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अब पाकिस्तान को J-35 स्टील्थ बॉम्बर विमान बेचने की तैयारी भी कर रहा है। ऐसे में J-10CE को लेकर किए गए दावों को नई “मार्केटिंग रणनीति” के तौर पर देखा जा रहा है।

J-10CE को बताया ‘परफेक्ट वॉर मशीन’

चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अन्य कर्मचारी जू दा ने J-10CE की तुलना “बच्चे” से की। उन्होंने कहा कि इस विमान को वर्षों तक विकसित किया गया और जब सही समय आया, तब इसने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया। J-10CE, चीन के J-10C फाइटर जेट का एक्सपोर्ट वर्जन है और इसे 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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