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नीति आयोग की बैठक में नहीं शामिल हुए इन 10 राज्यों के मुख्यमंत्री, देख लें पूरी लिस्ट

NITI Aayog: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में देश की राजधानी दिल्ली में नीति आयोग शासी परिषद की बैठक हुई। जिसमें 10 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। इनमें एक नाम सबसे हैरान करने वाला बिहार का रहा। आपको बताते हैं कि इस बैठक से किस-किस राज्य ने दूरी बना ली।

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इन 10 मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की बैठक से बनाई दूरी।

New Delhi: नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि शासी परिषद की बैठक में बिहार, केरल समेत 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल नहीं हुए। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। बैठक में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और लेफ्टिनेंट गवर्नर और अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में गांवों में गरीबी को शून्य स्तर पर लाने यानी इससे पूरी तरह समाप्त करने के विचार पर गहन चर्चा हुई।

किस-किस राज्य के मुख्यमंत्री बैठक में नहीं पहुंचे?

क्रमांकराज्यमुख्यमंत्री
1बिहारनीतीश कुमार
2केरलपिनराई विजयन
3तमिलनाडुएम के स्टालिन
4कर्नाटकसिद्धारमैया
5तेलंगानारेवंथ रेड्डी
6दिल्लीअरविंद केजरीवाल
7पंजाबभगवंत मान
8हिमाचल प्रदेशसुखविंदर सिंह सुक्खू
9झारखंडहेमंत सोरेन
10पुदुचेरीएन. रंगास्वामी

'जिन्होंने भाग नहीं लिया, तो यह उनका नुकसान'

सुब्रमण्यम ने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने वालों में बिहार, केरल के अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और पुदुचेरी हैं। सुब्रमण्यम ने कहा, 'यह बैठक इस बात के लिए थी कि राज्यों के विकास को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है और उसमें कैसे योगदान दिया जा सकता है। अगर उन्होंने भाग नहीं लिया तो यह उनका नुकसान है।'

अचानक बैठक छोड़कर चली गईं सीएम ममता बनर्जी

सीईओ ने बैठक से बाहर चली गईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बारे में कहा कि उन्होंने दोपहर के भोजन से पहले बोलने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। हालांकि राज्यों के नाम के हिसाब से उनकी बारी दोपहर में आती। सुब्रमण्यम ने कहा कि जब मुख्यमंत्री का समय समाप्त हुआ, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बस माइक थपथपाया। इस पर उन्होंने बोलना बंद कर दिया और बाहर चली गईं। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

नीतीश कुमार की अनुपस्थिति से सियासी हलचल तेज

बिहार के बारे में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य में विधानसभा सत्र में व्यस्त होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का जिक्र करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि वह चाहते हैं कि राज्य एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के लिए प्रतिस्पर्धा करें ताकि निवेश सभी राज्यों तक पहुंच सके। खासकर उन राज्यों तक जो कम सफल हैं।

'जिलों को मजबूत बनाने पर अधिक खर्च करें राज्य'

बैठक में आबादी के प्रबंधन और गरीबी को शून्य स्तर पर लाने यानी उसे पूरी तरह से समाप्त करने के विचार पर भी चर्चा हुई। सुब्रमण्यम के अनुसार प्रधानमंत्री चाहते हैं कि राज्य जिलों को मजबूत बनाने पर अधिक खर्च करें ताकि वे विकास को गति दे सकें। प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए प्राथमिकता के आधार पर गरीबी को खत्म करने का सुझाव दिया।

नीति आयोग के सीईओ के अनुसार उन्होंने कहा, 'हमें गरीबी व्यक्तिगत आधार पर निपटने की जरूरत है।' सुब्रमण्यम के अनुसार उन्होंने कहा है कि आकलन के बाद गांवों को ‘गरीबी से मुक्त’ गांव घोषित किया जा सकता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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