चंडीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट निशांत कुमार यादव ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्रशासन ने सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की वर्दी, कपड़ों, लोगो, स्टीकर और झंडों की खुलेआम बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
अब चंडीगढ़ की सीमा के भीतर कोई भी दुकानदार किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा बलों से संबंधित सामग्री तब तक नहीं बेच सकेगा, जब तक कि वह खरीदार का विस्तृत रिकॉर्ड और आधिकारिक पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) अपने पास जमा न कर ले। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य वर्दी की पहुंच को केवल अधिकृत व्यक्तियों तक सीमित करना है।
आतंकी खतरों और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया कदम
जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि यह निर्णय देश में संभावित आतंकी हमलों और असामाजिक तत्वों द्वारा सुरक्षा बलों के प्रतीकों के दुरुपयोग की आशंकाओं को देखते हुए लिया गया है।
अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जहां उपद्रवी तत्व या आतंकवादी पुलिस और सेना की वर्दी पहनकर सुरक्षा घेरे को चकमा देने या सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास करते हैं। इस नए नियंत्रण के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वर्दी या उससे जुड़ी कोई भी सामग्री गलत हाथों में न जाए और हर खरीद-फरोख्त का एक स्पष्ट ट्रेल (दस्तावेजी प्रमाण) मौजूद रहे।
दुकानदारों के लिए अनिवार्य अनुपालन और रिकॉर्ड संधारण
प्रशासन के इस नए नियम के बाद अब विक्रेताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें न केवल खरीदार की पहचान सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि एक रजिस्टर भी मेंटेन करना होगा जिसमें बिक्री की तारीख, खरीदार का नाम, पद और उसके विभाग से संबंधित जानकारी दर्ज हो। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से सुरक्षा बलों के वेश में घूमने वाले संदिग्धों की पहचान करना आसान हो जाएगा। जो भी दुकानदार इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उसके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
