NEET-UG 2026 Paper Leak: नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को मामले के पांच प्रमुख आरोपियों को 2 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के लिए उसकी सीबीआई रिमांड सात दिन और बढ़ाने की मांग की है।
सीबीआई की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद जांच एजेंसी ने इन सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इन्हें जेल भेजने का आदेश सुरक्षित किया।
इन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया
- मांगीलाल बीवाल
- विकास बीवाल
- दिनेश बीवाल
- यश यादव
- शुभम खैरनार
- धनंजय लोखंडे
क्या है इन आरोपियों का कनेक्शन?
जांच सूत्रों के मुताबिक, ये आरोपी उस बड़े इंटर-स्टेट सिंडिकेट (अंतर-राज्यीय नेटवर्क) का हिस्सा हैं, जिसने परीक्षा से पहले कथित 'गेस पेपर' और हस्तलिखित प्रश्न सेट को मोटी रकम के बदले छात्रों और कोचिंग माफियाओं तक पहुंचाया था। धनंजय लोखंडे और बीवाल बंधुओं पर इस लीक सामग्री को महाराष्ट्र और राजस्थान के अलग-अलग केंद्रों और बिचौलियों के बीच कोऑर्डिनेट करने और डिजिटल माध्यमों (व्हाट्सएप/टेलीग्राम) से फैलाने का गंभीर आरोप है।
सीबीआई अब तक मुख्य मास्टरमाइंड पी.वी. कुलकर्णी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन आरोपियों से पुलिस कस्टडी के दौरान हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे इस पूरे 'इंसाइडर नेटवर्क' की कड़ियों को जोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी। फिलहाल, अदालती आदेश के बाद इन सभी को 2 जून तक सलाखों के पीछे रहना होगा।
'केमिस्ट्री के 100% सवाल ‘गेस पेपर’ से मैच'
एनटीए और सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि परीक्षा से पहले ही केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) के प्रश्नों का शत-प्रतिशत मिलान होने वाले दस्तावेज छात्रों के बीच घूम रहे थे। इसी सुराग ने जांच एजेंसियों को एनटीए के भीतर और उससे जुड़े एक 'इंसाइडर नेटवर्क' (अंदरूनी सिंडिकेट) तक पहुंचाया।
परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक 'गेस पेपर' या मॉक टेस्ट की 60 पन्नों की हैंडरिटन पीडीएफ फाइल वायरल हो रही थी। जब जांच एजेंसियों और एनटीए ने इसकी जांच की तो सामने आया कि परीक्षा में पूछे गए केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल इस गेस पेपर से हूबहू मेल खा रहे थे। किसी बाहरी व्यक्ति के लिए बिना अंदरूनी मदद के इतने सटीक सवाल तैयार करना नामुमकिन था, जिसने एनटीए के भीतर सक्रिय एक 'इंसाइडर सिंडिकेट' की पोल खोल दी।
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