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बिहार में जाति जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, लालू ने बीजेपी पर साधा निशाना

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 18, 2023, 08:54 AM IST

Bihar Caste Census: बिहार में जातिगत आरक्षण मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, बता दें कि पटना हाईकोर्ट के रोक वाले फैसले के खिलाफ बिहार सरकार ने अर्जी लगाई है।

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बिहार जातिगत जनगणना मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

KEY HIGHLIGHTS
  • बिहार में जातिगत गणना पर पटना हाईकोर्ट की रोक
  • आरजेडी और जेडीयू ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
  • अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत में

Bihar Caste Census: बिहार में जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट(Patna Highcourt stay on Caste Census)द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। इन सबके बीच हर किसी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर है, जहां सुनवाई होनी है। इन सबके बीच आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi Government)सरकार पर एकबार फिर तंज कसा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू (Lalu Prasad Yadav)ने राज्य से होकर बहने वाली गंडक नदी में घड़ियालों की गिनती के संबंध में कहा कि सरकार घड़ियाल की गिनती कर लेती है लेकिन देश के बहुसंख्यक गरीबों, वंचितों, उपेक्षितों, पिछड़ों और अतिपिछड़ों की नहीं। आरएएस और बीजेपी देश के ओबीसी को जानवरों से भी बदतर मानती है इसलिए इन्हें जातीय गणना और जातीय सर्वे से दिक्कत है। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी(BJP) को पिछड़ों से इतनी नफरत और दुश्मनी क्यों?

केंद्र सरकार का नजरिया

दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में एक गैरसरकारी संगठन वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है।उल्लेखनीय है कि केन्द्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह जनगणना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अलावा अन्य सामाजिक समूहों की गणना नहीं करेगा।बिहार में इसका विरोध किया गया था जहां जाति आधारित गणना को लेकर एक प्रस्ताव विधानमंडल के दोनों सदनों में दो बार पारित किया था जिसका समर्थन भाजपा के सदस्यों ने भी किया था।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली प्रदेश की सरकार ने पिछले साल जातियों के एक सर्वेक्षण का आदेश दिया था जिसमें कहा गया था कि पिछड़ी जाति की जनगणना लगभग एक सदी पहले हुई थी और एक नए अनुमान की तत्काल आवश्यकता थी।हालांकि पटना उच्च न्यायालय द्वारा इस जनगणना पर रोक लगा दिए जाने के बाद हाल ही में राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

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