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आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया कनाडा, भारत के खिलाफ ट्रूडो के बयान पर भड़का श्रीलंका

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 26, 2023, 08:06 AM IST

India Canada Issue: श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडाई पीएम को एक संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि किसी को दूसरे देशों में घुसकर यह बताना चाहिए कि हमें अपने देश पर कैसे शासन करना चाहिए।

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श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी

Photo : ANI

India Canada Issue: भारत के खिलाफ बयानबाजी करके कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। अब ट्रूडो के बयान पर श्रीलंका भी भड़क गया है। श्रीलंका क विदेश मंत्री अली साबरी ने भारत का समर्थन करते हुए कनाडा को आतंकियों का सुरक्षित पनाहगाह बताया है। उन्होंने जस्टिन ट्रूडो पर भी हमला बोला है। साबरी ने कहा है कि कनाडाई प्रधानमंत्री के पास बिना किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाने का यही तरीका है।

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में श्रीलंकाई विदेश मंत्री ने कहा, जस्टिन ट्रूडो इसी तरह के बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। उन्होंने श्रीलंका को लेकर भी यही कहा था कि नरसंहार हुआ था। एक सरासर झूठ था। सभी जानते हैं कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ।

नाजियों का स्वागत कर रहे हैं ट्रूडो

श्रीलंकाई विदेश मंत्री ने कहा, वह ट्रूडो के बयान से बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हैं। वह ऐसे अपमानजनक और अप्रमाणित आरोपों के साथ सामने आते रहते हैं। उन्होंने कहा, कल हमने देखा कि वह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अतीत में नाज़ियों से जुड़े रहे किसी व्यक्ति का जोरदार स्वागत किया था। यह संदेहास्पद है और हम अतीत में इससे निपट चुके हैं।

दूसरे देश को बताने की जरूरत नहीं कि शासन कैसे करें

श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडाई पीएम को एक संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि किसी को दूसरे देशों में घुसकर यह बताना चाहिए कि हमें अपने देश पर कैसे शासन करना चाहिए। हम अपने देश को किसी और से ज्यादा प्यार करते हैं। इसीलिए तो हम अपने देश में हैं। हम उस बयान से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं।

भारत की प्रतिक्रिया बिना लागलपेट वाली

श्रीलंकाई मंत्री ने कहा, कनाडा के आरोपों के बाद भारत की प्रतिक्रिया बहुत सख्त और बिना लागलपेट वाली रही है। उन्होंने कहा, मैंने आतंकवाद के कारण अपने कई दोस्तों और सहयोगियों को खोल दिया। इन मामलों में हमारी नीति और स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। बता दें, 18 सितंबर को जस्टिन ट्रूडो द्वारा कनाडा में खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगाने के बाद भारत और कनाडा के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। हालांकि, भारत ने आरोपों को खारिज कर दिया, उन्हें "बेतुका" और "प्रेरित" बताया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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