मुकुल रॉय का विधायक पद खत्म
एक अहम फैसले में कोलकाता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बार राशिदी ने सोमवार को विधायक मुकुल रॉय को उनके पद से अयोग्य घोषित कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रॉय का दल-बदल साबित हुआ है, इसलिए उन्हें कृष्णानगर उत्तर सीट से विधायक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
अदालत ने न सिर्फ अयोग्यता का आदेश दिया, बल्कि विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी द्वारा दिए गए पूर्व निर्णय को भी खारिज कर दिया। स्पीकर ने मुकुल रॉय की अयोग्यता पर निर्णय लेने में देरी की थी, जिसे अदालत ने ‘पक्षपाती’ रवैया बताया।
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। नवंबर 2017 में वे तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। बाद में उनके बेटे शुभ्रांग्शु रॉय ने भी भाजपा का दामन थामा। पार्टी में योगदान को देखते हुए 2020 में मुकुल रॉय को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में वे बिना ज़्यादा प्रचार किए ही कृष्णानगर उत्तर से बड़े अंतर से जीते, लेकिन चुनावों के बाद अचानक फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ऐतिहासिक फैसला है। यह वही याचिका है जो मैंने विपक्ष के नेता की हैसियत से दायर की थी। माननीय अदालत ने मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराते हुए स्पीकर द्वारा दिए गए पक्षपाती आदेश को भी रद्द कर दिया है। भले ही देर लगे, लेकिन सत्य की ही जीत होती है। संविधान और दसवीं अनुसूची की मर्यादा को बचाते हुए अदालत ने दल-बदल मामलों में स्पीकर की पक्षधरता को स्पष्ट कर दिया है। मैं इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करता हूं।
यह फैसला बंगाल की राजनीति में हलचल मचाने वाला माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव देखे जा सकते हैं।
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