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एक और ट्रेन हादसा...अब बंगाल में पटरी से उतरी मालगाड़ी

Goods train derails in West Bengal: पश्चिम बंगाल में ट्रेन हादसा हुआ है। यहां रानाघाट के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई है। इससे पहले देर रात राजस्थान के अलवर में भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। वहीं, शनिवार को यूपी के अमरोहा में भी मालगाड़ी डिरेल हुई थी।

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Goods train derails in West Bengal: पश्चिम बंगाल में ट्रेन हादसा हुआ है। यहां रानाघाट के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की ओर से ट्रेन डिरेल होने का वीडियो भी जारी किया गया है। सियालदह पूर्वी रेलवे डीआरएम दीपक निगम ने बताया कि रविवार शाम को इंटरनल शंटिंग के दौरान रानाघाट के मालगाड़ी वार्ड में एक मालगाड़ी का पिछला गार्ड बोगी पटरी से उतर गया। उन्होंने बताया, सियालदह रानाघाट ब्रांच पर ट्रेनों की आवाजाही सामान्य है। रेलवे कर्मचारियों ने मालगाड़ी को पटरी पर लाने का काम शुरू कर दिया है।

बता दें, राजस्थान के अलवर यार्ड में भी एक मालगाड़ी के तीन डिब्बे पलट गए थे। यह हादसा शनिवार देर रात हुआ था। उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि यह घटना यार्ड में हुई, लेकिन इससे दिल्ली-अलवर मार्ग पर ट्रेन परिचालन अप्रभावित रहा। अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना देर रात ढाई बजे हुई। सुबह नौ बजे तक ट्रैक साफ कर लिया गया था और कुछ देर में बाड़मेर और मथुरा के बीच पहली यात्री ट्रेन यहां से गुजरी।

शनिवार को अमरोहा में डिरेल हुई थी मालगाड़ी

बता दें, लगातार दूसरे दिन यह रेल हादसा हुआ है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में मालगाड़ी डिरेल हो गई थी। मालगाड़ी के 7 डिब्बे ट्रैक से उतर गए थे, जिससे ट्रैक बाधित हो गया था और दिल्ली-लखनऊ रूट पर कई ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा था। जानकारी के मुताबिक, मालगाड़ी मुरादाबाद से गाजियाबाद जा रही थी। अमरोहा के कल्याणपुरा गेट 27c के पास यह डिरेल हो गई और कई कंटेनर पलट गए थे, जिससे दोनों लाइनें ब्लॉक हो गई थीं।

बार-बार हो रहे रेल हादसे

बता दें, बार-बार हो रहे रेल हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे पहले 18 जुलाई को यूपी के गोंडा में ट्रेन हादसा हुआ था। इसमें 4 यात्रियों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे। वहीं, 19 जुलाई को गुजरात के वलसाड में भी ट्रेन हादसा हुआ था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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