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Kargil War के उस पायलट की कहानी, जो पहुंच गया था पाकिस्तान; जानें नचिकेता के साथ क्या-क्या हुआ

Pilot Nachiketa Story: इंडियन एयरफोर्स के के फ्लाइट लेफ्टिनेंट कम्बमपति नचिकेता कारगिल युद्ध के दौरान मिग-27 से दुश्मनों पर अटेर रप रहे थे। इसी बीच उनके फाइटर जेट के इंजन में आग लग गई। जेट क्रैश हुआ और नचिकेता पीओके में जा गिरे। बंदूक की गोलियां खत्म होने तक वो लड़ते रहे। पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया। फिर क्या हुआ आपको बताते हैं।

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भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट कम्बमपति नचिकेता की कहानी।

Kargil Vijay Diwas 2023: ये कहानी कारगिल युद्ध में अपने साहस का लोहा मनवाने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट कम्बमपति नचिकेता की है। साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था। कारगिल युद्ध के दौरान इंडियन एयर फोर्स ने अपनी पूरी ताकत के साथ पाकिस्तान पर हमले का प्लान तैयार कर लिया था। कारगिल युद्ध में इंडियन एयरफोर्स के ऑपरेशन में फ्लाइट लेफ्टिनेंट कम्बमपति नचिकेता मिग-27 उड़ा रहे थे। इसी दौरान उनके फाइटर जेट के इंजन में आग लग गई और वो पीओके में जा गिरे। आपको बताते हैं कि जब नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ा, तो फिर उनके साथ क्या-क्या हुआ।

जब पाक सीमा में जा गिरा वायुसेना का ये जवान

कारगिल युद्ध के दौरान 26 साल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट के नचिकेता इंडियन एयरफोर्स की टीम-9 में थे। इस दौरान दुश्मन के ठिकानों पर 17,000 फीट की ऊंचाई से अटैक करने का प्लान बना। नचिकेता को कारगिल के बटालिक सेक्‍टर से दुश्‍मन को खदेड़ने की जिम्‍मेदारी दी गई थी। नचिकेता ने उड़ान भरी और मिग-27 से टारगेट सेट कर फायर जैसे ही फायर किया, उनके एयरक्राफ्ट के इंजन को पाकिस्‍तान की स्टिंगर मिसाइल ने हिट किया। इंजन में आग लग गई, नचिकेता ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, मगर उनका जेट क्रैश हो गया। नचिकेता का जेट तो भारतीय सीमा में गिरा लेकिन वे पीओके में जा गिरे।

पाक की सीमा में भी दुश्मनों से लड़ते रहे नचिकेता

नचिकेता के साथी स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहूजा उन्हें मिग-21 से ही खोज रहे थे, इसी बीच पाकिस्तानी मिसाइल अन्जा ने आहूजा के विमान को निशाना बना लिया। नचिकेता नीचे गिरे ही थे कि पाकिस्तानी सैनिकों ने उन पर अटैक करना शुरू कर दिया। नचिकेता रुके नहीं, उन्होंने तब तक लड़ाई लड़ी जब तक उनकी पिस्तौल की गोलियां खत्म नहीं हो गईं। जैसे ही गोलियां खत्म हुईं, दुश्मनों ने उन्हें घेर लिया। नचिकेता को पाकिस्‍तान की सेना ने पकड़ लिया और वह पहले प्रिजनर ऑफ वॉर माने गए। पाक सेना उन्‍हें लेकर रावलपिंडी गई और यहां पर उन्‍हें बुरी तरह से पीटा गया।

नचिकेता को जेल में पाकिस्तानियों ने किया टॉर्चर

नचिकेता को पाकिस्तान की जेल में बुरी तरह टॉर्चर किया गया। भारत का प्लान उगलवाने के लिए उनपर खूब अत्याचार हुए, यातनाओं की हदें पार कर दी गईं। पाकिस्तानी सेना उन पर जुल्म पर जुल्म कर रही थी, उनका मकसद नचिकेता को जान से मार देने का था। हालांकि एक अधिकारी ने दखल दिया और ये कहा कि नचिकेता एक युद्ध बंदी है और नियम के मुताबिक ही उनके साथ व्यवहार होना चाहिए। नचिकेता करीब एक हफ्ते तक बंदी रहे और तीन जून 1999 को पाक ने उन्‍हें रिहा किया गया था।

नचिकेता ने कहा- मैं हीरो नहीं, सैनिक हूं

जब पाकिस्तान की यातनाएं सहने के बाद नचिकेता की वतन वापसी हुई, तो लोगों ने उन्हें हीरो पुकारना शुरू कर दिया, जिसके जवाब में उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि 'मैं केवल एक सैनिक हूं और अगली उड़ान के लिए तैयार हूं।' इस घटना के दौरान नचिकेता के रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई, जिसके चलते उनकी तैनाती फाइटर्स जेट में नहीं हो पाई। हालांकि उन्हें वायुसेना के दूसरे बेड़े में शामिल किया गया। कारगिल युद्ध में उनके शौर्य को देखते हुए उन्हें वायु सेना गैलेंट्री पदक से नवाजा गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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