महाराष्ट्र में बीएमसी के चुनाव भले ही हो गए हों, लेकिन इसके मेयर पद को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। सभी दल अपनी-अपनी जोर-आजमाइश में लगे हैं। इस बीच सूबे के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मेयर पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि बीएमसी का मेयर कौन होगा। रविवार को बीएमसी के नवनिर्वाचित शिवसेना सदस्यों से मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने मेयर पद लेकर साफ किया कि मुंबई का मेयर महायुति से ही होगा। इतना ही नहीं कल्याण-डोंबिवली जैसे पड़ोसी शहरों में भी महायुति का मेयर होगा।
इस दौरान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि मतदाताओं ने भावनात्मक मुद्दों के बजाय विकास को चुना है। उन्होंने पार्षदों को ‘नज़रबंद’ रखे जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना निडर है। उन्होंने कहा कि होटल में नवनिर्वाचित पार्षदों को आपस में संवाद के लिए एक साझा मंच मिला है। कोंकण संभागीय आयुक्त के पास 29 पार्षदों के समूह का पंजीकरण कराना है, इसलिए मैं उनसे मिलना चाहता था।
लोकसभा और विधानसभा पर होगा इसका असर
इस दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि जनता ने शिवसेना (यूबीटी) और विकास-विरोधी ताकतों को नकार दिया है। उन्होंने पार्षदों से वार्ड-स्तरीय विकास कार्ययोजनाएं तैयार करने और अपने-अपने वार्ड को आदर्श बनाने का आह्वान किया। साथ ही पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी आचरण से बचने की चेतावनी दी। शिंदे ने यह भी कहा कि नगर निगम चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, उसके बाद शिवसेना का स्थान रहा। उन्होंने इन नतीजों को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों का संकेत बताया।
शिंदे ने नवनिर्वाचित शिवसेना सदस्यों से ‘पगड़ी-फ्री मुंबई’ जैसी योजनाओं पर सक्रियता से काम करने की अपील भी की। यह योजना पुरानी और जटिल पगड़ी (किरायेदारी) व्यवस्था में सुधार कर रुके हुए पुनर्विकास कार्यों को गति देने से जुड़ी है।
आज की शिवसेना धोखा नहीं देगी
महापौर पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर शिवसेना नेता और मंत्री उदय सामंत ने कहा कि बीएमसी चुनाव महायुति के रूप में लड़े गए थे। उन्होंने कहा कि शिवसेना वैसा नहीं करेगी जैसा 2019 के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के दौरान पहले की शिवसेना ने किया था। मेयर पद की पार्टी के भीतर उठ रही मांगों पर सामंत ने कहा कि हर पार्टी शीर्ष पद चाहती है, और बाल ठाकरे की जन्मशताब्दी का वर्ष होने से इस मांग को अलग महत्व मिल गया है।” विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई पार्षद ‘अप्राप्य’ हो जाएंगे और तब लोगों को समझ आएगा कि वे किस पार्टी से थे।
227 सदस्यीय बीएमसी में हालिया चुनावों में बीजेपी ने 89 और शिंदे-नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी एमएनएस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की।
