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मुस्लिमों को कैसे रिझाएगी भाजपा? लोकसभा चुनाव से पहले यूपी के लिए बनाया ये खास प्लान

Lok Sabha Chunav 2024: भाजपा ने नये साथी ने ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में मीडिया के सामने ये दावा किया था कि इस बार मुसलमान भाजपा को वोट देने जा रहा है। इस बीच ये खबर सामने आई कि पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी 'पसमांदा स्नेह यात्रा' निकालने की तैयारी में है। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का प्लान समझिए।

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लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

Photo : PTI

Uttar Pradesh News: लोकसभा चुनाव को लेकर जहां विपक्षी पार्टियां INDIA के नाम से एकजुट होने की कोशिश में जुटी हुई है, वहीं भारतीय जनता पार्टी अपनी कमजोरियों पर काम कर रही है। माना जाता है कि मुसलमान वोटर्स का झुकाव भाजपा को छोड़कर किसी भी दूसरी पार्टी की तरफ हो सकता है, मगर इस बार के चुनाव में पार्टी मुस्लिम मतदाताओं को साधने में जुट गई है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से हुई है, जहां की 29 मुस्लिम बाहुल्य लोकसभा सीटों पर भाजपा की नजर है। आपको इन सीटों का गुणा-गणित और भाजपा का प्लान समझाते हैं।

पसमांदा मुस्लिमों को आकर्षित करने का बनाया प्लान

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर भाजपा की निगाहें अब मुस्लिम वोटर्स पर है, इस ओर भाजपा ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। पसमांदा मुसलमानों को साथ लाने के लिए भाजपा चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। भाजपा उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को रिझाने के लिए 'पसमांदा मुस्लिम स्नेह यात्रा' आयोजित कर रही है। ये यात्रा देश की राजधानी दिल्ली से शुरू होकर तमाम जिलों तक जाएगी। माना जा रहा है कि भाजपा का ये दांव खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए है। इस यात्रा के जरिए वेस्ट यूपी के 11 जिलों में जाकर मुसलमानों से संवाद करने का प्लान है।

भाजपा से मुस्लिमों को जोड़ने की किसे मिली जिम्मेदारी?

पसमांदा स्नेह यात्रा की अगुवाई भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा कर रहा है। इस यात्रा के जरिए मुसलमानों को सरकार की उन योजनाओं से रूबरू कराया जाएगा, जो उसने हित से जुड़ी है। उपलब्धियां गिनाकर मुस्लिमों को चुनाव में साथ देने की अपील की जाएगी। अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्लान का जिक्र करें, तो गाजियाबाद और बुलंदशहर, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जिले में भाजपा की ये यात्रा पहुंचेगी। जहां पसमांदा मुस्लिमों के साथ बैठक होगी।

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड पर भी होगी नजर

ऐसी जानकारी सामने आई है कि भाजपा की ये यात्रा एक दिन के लिए उत्तराखंड के रुड़की में भी जाएगी, हालांकि इसके बाद बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और फिर शाहजहांपुर के रास्ते होते हुए यूपी के अन्य जिलों की ओर बढ़ जाएगी। भाजपा को ये बात अच्छे से मालूम है कि अगर 2024 में अपनी पकड़ मजबूत रखनी है, तो कोई कोर कसर नहीं छोड़नी होगी। मुस्लिमों को रिझाने के हाल के समय में कई बार ऐसी कोशिशें हो चुकी हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

आखिर क्यों भाजपा को साधने में जुटी है भाजपा?

अगर पसमांदा मुसलमानों की बात करें, तो इसमें 20 से अधिक जातियां हैं। जिनमें सैफी, अंसारी, अल्वी, कुरैशी... जैसी कई जातियां शामिल हैं। रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की। जिसके बाद ही उसकी उम्मीद जाग गई। दरअसल, बताया जाता है कि रामपुर लोकसभा सीट पर करीब 45 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जहां भाजपा को 42 हजार वोटों से जीत हासिल हुई थी। ऐसे में अब भाजपा की उम्मीद बढ़ गई है और उसे ऐसा लगने लगा है कि मुसलमान वोटर्स उस पर मेहरबान हो सकता है। ओम प्रकाश राजभर ने भी एनडीए में शामिल होने के बाद ये दावा किया था कि इस बार मुसलमान बीजेपी को वोट देने जा रहा है। उनका दावा कितना मजबूत साबित होगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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