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Bihar: इंडियन एयरफोर्स का विमान लैंडिंग के दौरान हुआ क्रैश, पायलट की सूझबूझ से टला हादसा

Bihar News: बिहार में बड़ा विमान हादसा होते-होते टल गया। पायलट की सूझबूझ की वजह से बड़ा हादसा टला, हालांकि विमान क्रैश हो गया। इसकी जानकारी आपदा प्रबंधन ने दी है। मुजफ्फरपुर में बाढ़ राहत कार्य के दौरान भारतीय वायुसेना के एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर को पानी में उतरना पड़ा। सभी चालक दल सुरक्षित हैं।

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बिहार के मुजफ्फरपुर में भारतीय वायुसेना का विमान हुआ क्रैश।

Air Force Plane Accident: बिहार के मुजफ्फरपुर में भारतीय वायुसेना का एक विमान क्रैश हो गया। प्लेन का इंजन फेल होने के बाद पायलट ने पानी में लैंडिंग किया। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बयान जारी किया है। जिसमें इस हादसे को लेकर उन्होंने जानकारी साझा की है।

सूझबूझ से टला बड़ा विमान हादसा

प्लान का इंजन फेल होने के बाद पायलट ने पानी में विमान की लैंडिंग कराई। पानी में लैंडिंग के दौरान विमान क्रैश हो गया, हालांकि सभी एयरफोर्स जवान और पायलट सुरक्षित बताए जा रहे हैं। पायलट की सूझबूझ से बड़ा विमान हादसा टल गया।

कहां क्रैश हुआ एयरफोर्स का विमान?

शुरुआती जानकारी आई थी कि मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड घनश्यामपुर पंचायत के बेसी बाजार के पास सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश हो के पानी में गिर गया। इसके बाद प्रत्यय अमृत ने बयान में बताया कि पायलट और घायल जवानों को इलाज के लिए एसकेएमसीएच भेजा जा रहा है। सभी एयरफोर्स जवान और पायलट सुरक्षित है। एसडीआरएफ की टीम ने क्रैश होते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

बिहार के मुजफ्फरपुर में बाढ़ राहत कार्य के दौरान भारतीय वायुसेना के एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर को पानी में उतरना पड़ा। सभी चालक दल सुरक्षित हैं।

भारतीय वायुसेना ने जारी किया बयान

बिहार के सीतामढ़ी सेक्टर में बाढ़ राहत कार्यों में लगे भारतीय वायुसेना (IAF) के ALH हेलीकॉप्टर ने तकनीकी समस्या के कारण बाढ़ वाले क्षेत्र में एहतियातन लैंडिंग की। सभी चालक दल सुरक्षित बताए जा रहे हैं, नागरिक जीवन या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। IAF ने कारण का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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