Nitisk Kumar Breaks bjp jdu Alliance: बिहार देश का ऐसा सूबा जो हमेशा से सुर्खियों में रहा है और बात यहां की राजनीति की हो तो कहना ही क्या, हाल ही में बिहार में बड़ी राजनैतिक उथलपुथल हुई और सूबे की सत्ता ने बड़ा बदलाव देखा, हालांकि इस बदलाव के बाद भी सीएम तो नीतीश कुमार (nitisk kumar) ही हैं बस सहयोगी दल बदल गया है।
जब तमाम नेता अपनी-अपनी पार्टी को अलविदा कह बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, ऐसे समय में नीतीश ने पाला क्यों बदला, आज जब बीजेपी पार्टी में भविष्य ज्यादा सुरक्षित है तो ऐसे नाजुक वक्त में नीतीश ने बिहार में क्यों आरजेडी के साथ जाने का फैसला लिया ये प्रश्न लोगों के जेहन में आ रहा है।
गौर हो कि नीतीश कुमार पुराने और बेहद अनुभवी राजनेता हैं उन्होंने क्यों इतना बड़ा निर्णय लिया और एक वक्त में धुरविरोधी माने जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल के साथ जाने का निर्णय लिया ये बड़ा सवाल है जिसके जबाव भी कई तरीके के सामने आए हैं, कहा जा रहा है कि नीतीश को एक मनोवैज्ञानिक डर ये भी था कि उनकी पार्टी को 2020 की विधानसभा चुनावों में महज 43 सीटें और भारतीय जनता पार्टी को 75 सीटें मिली थीं फिर भी कम सीटों वाले दल को मुख्यमंत्री का पद बीजेपी ने क्यों सौंपा वैसे भी बड़े राजनीतिक दल का डर तो छोटे राजनीतिक दल के अस्तित्व को बना ही रहता है।
प्रधानमंत्री पद पर नीतीश का निशाना !
वहीं कहने वालों का ये भी कहना है कि आरजेडी का साथ पकड़कर नीतीश कुमार ने जो तीर चलाया है उस तीर का निशाना 2024 का प्रधानमंत्री पद है, वैसे भी नीतीश कुमार एनडीए के सहयोगी होते हुए पीएम मोदी के विकल्प बनने का सपना संजो नहीं सकते थे, जो कहा जाता है उनके मन में काफी पहले से है सो एनडीए के विरोधी के रूप में नीतीश कुमार ने यह सपना पूरा करने की कोशिश की है।
नीतीश कुमार के मन में एक बार फिर से पीएम पद की आकांक्षा हिलोरे लेने लगी है

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वैसे भी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकर के पद संभालने के बाद नीतीश कुमार के मन में एक बार फिर से पीएम पद की आकांक्षा हिलोरे लेने लगी है जिसे विपक्ष का साथ भी मिलता दिख रहा है, शायद इसीलिए नीतीश बाबू ने ये बड़ा दांव खेला है। वैसे भी राजनीतिक तजुर्बे की बात करें तो काफी सालों तक मुख्यमंत्री का अनुभव रखने वाले, साफ छवि के नेता नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में मोदी के समक्ष खड़े हो सकते हैं ऐसा विपक्षी खेमे के तमाम नेताओं का मानना है।
