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छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल के बेटे को क्या शराब घोटाले मामले में ईडी ने भेजा समन? पूर्व सीएम ने खुद बताया सारा सच

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 और 2022 के बीच हुआ था, ऐसा कहना प्रवर्तन निदेशालय का है। उस दौरान राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। पूर्व सीएम के बेटे के इससे तार जुड़ने को लेकर चल रही अटकलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि मेरे बेटे को ईडी से कोई समन नहीं मिला।

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भूपेश बघेल।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को कहा कि उनके बेटे को प्रवर्तन निदेशालय से एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कोई नोटिस नहीं मिला है। बघेल का बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 15 मार्च को केंद्रीय एजेंसी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने के लिए बुलाया गया है।

भूपेश बघेल बोले- मेरे बेटे को ईडी से कोई समन नहीं मिला

इन खबरों के बाद संवाददाताओं का दल आज सुबह से ही भूपेश बघेल के भिलाई स्थित आवास और रायपुर के फायर ब्रिगेड चौक स्थित नेताजी सुभाष स्टेडियम में ईडी कार्यालय के बाहर जमा हो गया था। यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पुत्र ईडी के समक्ष पेश होंगे, भूपेश बघेल ने कहा कि यदि नोटिस नहीं मिला है तो (ईडी के पास) जाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब समन तामील होगा, तो उसका अनुपालन किया जाएगा।

ईडी का काम मीडिया में सनसनी फैलाना है- बघेल

भूपेश बघेल ने भिलाई में अपने घर के बाहर संवाददाताओं से कहा, 'ईडी का काम मीडिया में सनसनी फैलाना है.. एजेंसी का इस्तेमाल लोगों को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। अब तक वे यही करते आ रहे हैं। मेरे खिलाफ सात साल से सीडी का मामला चल रहा था। हाल ही में अदालत ने मुझे सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह एक राजनेता को बदनाम करने की भाजपा की साजिश है।'

आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि 10 मार्च को ईडी ने कथित शराब घोटाला मामले में उनके बेटे के खिलाफ धनशोधन जांच के तहत दुर्ग जिले के भिलाई शहर में भूपेश बघेल के आवास पर छापा मारा था। इसके अलावा, चैतन्य के कथित करीबी सहयोगी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल सहित 13 और ठिकानों पर भी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत तलाशी ली गई थी। सूत्रों के मुताबिक, तलाशी करीब आठ घंटे तक चली। इस दौरान ईडी ने लगभग 30 लाख रुपये नकद और कुछ दस्तावेज जब्त किए।

तलाशी के दौरान भूपेश बघेल ने कही थी ये बड़ी बात

छापेमारी के बाद, अपुष्ट खबरें थीं कि चैतन्य को ईडी ने शनिवार को अपना बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था। तलाशी के दौरान अपने घर पर मौजूद भूपेश बघेल ने कहा था कि ईडी की कार्रवाई भाजपा की हताशा का नतीजा है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 11 मार्च को इस कार्रवाई के विरोध में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और ईडी के पुतले जलाए थे।

ईडी के अनुसार, राज्य में कथित शराब घोटाला 2019 और 2022 के बीच हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस का शासन था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले कहा था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेब में 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गई।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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