प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (12 मार्च, 2023) को इस एक्सप्रेस-वे को देश को समर्पित करेंगे। पीएम के अनुसार, यह कनेक्टिविटी से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जो दक्षिण भारतीय सूबे के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, यह प्रगति का हाईवे है। बेंगलुरू-मैसूर एक्सप्रेस-वे के निर्माण (इसमें NH-275 का एक हिस्सा भी शामिल है) में चार रेल ओवरब्रिज, नौ अहम पुल, 40 छोटे पुल और 89 अंडरपास और ओवरपास का विकास भी शामिल हैं।
यही नहीं, यह वहां के Shrirangpatna, Coorg व Ooty सरीखे कई शहरों और पड़ोसी राज्य Kerala के बीच कनेक्टिविटी भी सुधारेगा। एक्सप्रेस-वे के रूट में ग्रीन फील्ड बाईपास भी रहेगा। इस हाईवे को केंद्र सरकार की फ्लैगशिप भारतमाला परियोजना (बीएमपी) के तहत बनाया गया है। यह कुल 118 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट है, जिसे लगभग 8480 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है।
ध्यान देने वाली बात है कि यह हाईवे बेंगलुरू और मैसूर के बीच सफर के समय को कम कर देगा। मौजूदा समय में बेंगलुरू से मैसूर तक का सफर तय करने में लगभग तीन घंटे का वक्त लगता है, पर इस एक्सप्रेस-वे के इस्तेमाल के चलते लोग 75 मिनट में एक शहर से दूसरे शहर (उक्त) पहुंच सकेंगे।
10 लेन वाले बेंगलुरू-मैसूर एक्सप्रेस-वे की शुरुआत बेंगलुरू में एनआईसीई एंट्रेस से होती है, जबकि यह मैसूर में रिंग रोड जंक्शन पर समाप्त होता है। यह एक्सप्रेस-वे इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि इस पर 110 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन चलाए जा सकें।
इस हाईवे को इस्तेमाल करने वालों से 135 रुपए टोल फीस के रूप में लिए जा सकते हैं। वैसे, एनएचएआई इस फीस को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। टोल प्लाजा पर 10 से अधिक गेट रहेंगे, जो कि स्मूद ट्रैफिक मूवमेंट के लिए फास्टैग लेन्स भी ऑफर करेंगे।
एक्सप्रेस-वे पर इसके अलावा पिट स्टॉप्स रहेंगे। साथ ही बीच में फूड ज्वॉइंट्स, पेट्रोल पंप, रेस्ट रूम्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग प्वॉइंट/स्टेशंस भी मिलेंगे। हालांकि, इन सारी चीजों को व्यवस्थित तरीके से चालू होने में थोड़ा समय लगेगा।
