Bengal UCC: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा में राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर सकती है। राज्य मंत्रिमंडल से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। पार्टी द्वारा बताई गई छह महीने की समय-सीमा से काफी पहले यह कदम उठाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इस मामले पर बृहस्पतिवार शाम विधानसभा में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा की गई और इसे अंतिम रूप दिया गया।
पश्चिम बंगाल में होगा सबसे अहम बदलाव
यह घटनाक्रम हाल के समय में पश्चिम बंगाल में कानूनी और सामाजिक नीति के सबसे अहम बदलावों में से एक हो सकता है, क्योंकि भाजपा यूसीसी को महत्वपूर्ण सुधार के तौर पर पेश कर रही है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि राज्य में सत्ता में आने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू किया जाएगा। शुभेंदु अधिकारी सरकार के एक मंत्री ने कहा, उत्तराखंड, गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने पहले ही यूसीसी प्रस्तावों को लागू कर दिया है। अब बंगाल भी भाजपा-शासित अन्य राज्यों की तर्ज पर इसे लागू करेगा, जैसा कि हमने चुनाव से पहले वादा किया था।
'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदला
इससे पहले 21 जून को कोलकाता नगर निगम ने शहर के पार्क सर्कस इलाके की एक बेहद प्रमुख सड़क 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर अब 'गोपाल मुखर्जी रोड' (Gopal Mukherjee Road) कर दिया। 'पश्चिम बंगाल दिवस' के खास मौके पर लिए गए इस फैसले की जानकारी खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करके दी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए लिखा, "अब समय आ गया है कि पश्चिम बंगाल अपने असली नायकों को याद करे, पुरानी गलतियों को सुधारे और उन्हें पूरा सम्मान दे।" उन्होंने कोलकाता नगर निगम के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि दशकों तक हमारे शहर की एक मुख्य सड़क का नाम एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिसने सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए मासूम नागरिकों के नरसंहार की साजिश रची थी। अब इस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी के नाम पर रखा जा रहा है, जिन्होंने दंगों के दौरान हजारों मासूमों की जान बचाने के लिए एक निडर रक्षक की भूमिका निभाई थी।
सड़क के नाम को लेकर क्या था इतिहास?
कोलकाता की इस प्रमुख सड़क के नाम को लेकर इतिहास में दो तरह के मत रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस सड़क का निर्माण कलकत्ता इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने किया था और 20 अप्रैल 1933 को इसका नाम 'सर हसन सुहरावर्दी' के सम्मान में रखा गया था। सर हसन सुहरावर्दी कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पहले मुस्लिम वाइस-चांसलर और एक प्रतिष्ठित मेडिकल प्रोफेशनल थे। इसी सड़क पर उनकी पारिवारिक संपत्ति 'कशाना' भी स्थित थी।
