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बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन के बीच एक्शन में सरकार, भारतीय नागरिकों की वापसी शुरू, 245 लौटे

Bangladesh Student Protest: सूत्रों के मुताबिक, पहले जत्थे में बांग्लादेश से कुल 245 भारतीय नागरिक वापस लौटे हैं। इनमें 125 भारतीय छात्र थे और 13 नेपाली छात्र थे। सरकार की ओर से कहा गया है कि भारतीय उच्चायोग बांग्लादेश में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है ताकि भारत आने के इच्छुक छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जा सके।

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Bangladesh Student Protest

Photo : AP

Bangladesh Student Protest: बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षक के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शन के बीच भारत सरकार एक्शन में आ गई है। बांग्लादेश में फंसे भारतीय छात्रों की वतन वापसी शुरू हो गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पहले जत्थे में कुल 245 भारतीय नागरिक वापस लौटे हैं। इनमें 125 भारतीय छात्र थे और 13 नेपाली छात्र थे। सरकार ने कहा है कि ढाका में भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश में भारतीय सहायक उच्चायोग भारतीय नागरिकों की किसी भी सहायता के लिए उपलब्ध हैं।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भारतीय उच्चायोग बीएसएफ और आव्रजन ब्यूरो के साथ समन्वय में बांग्लादेश से भारत वापस आने वाले भारतीय छात्रों की सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही भारतीय उच्चायोग बांग्लादेश में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है ताकि भारत आने के इच्छुक छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जा सके।

बांग्लादेश में 15000 भारतीय

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वर्तमान में 8,000 छात्रों सहित लगभग 15,000 भारतीय बांग्लादेश में रह रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हमने बांग्लादेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों एवं हमारे छात्रों को उनकी सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए एक परामर्श जारी किया है। हमसे संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर खुद इस मामले पर करीब से नजर रख रहे हैं।

काफी हिंसक हुआ प्रदर्शन

बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है। शुक्रवार को पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले दागे, साथ ही राजधानी ढाका में लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही हिंसक प्रदर्शनों के बीच इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं। बता दें, बांग्लादेश में हो रहे हिंसक प्रदर्शन में 64 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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