'जिसने हिंदुओं पर अत्याचार किया, वो पार्टी...', बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की हार पर क्यों खुश हैं जावेद अख्तर?
- Edited by: Piyush Kumar
- Updated Feb 14, 2026, 08:42 AM IST
बांग्लादेश आम चुनाव में जहां एक तरफ बीएनपी की जीत हुई है, वहीं दूसरी ओर दक्षिणपंथी विचारधारा की पार्टी जमात-ए-इस्लामी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। जमात-ए-इस्लामी की शिकस्त पर बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर ने बांग्लादेश चुनाव नतीजे पर प्रतिक्रिया दी।
Bangladesh Election: बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जोरदार जीत हासिल की है। बीएनपी ने कुल 211 सीटें जीतीं। इस जीत के साथ बीएनपी ने देश की राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत कर लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस पार्टी के चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
वहीं, इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। इस पार्टी को सिर्फ 68 सीटें हासिल हुईं। बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक समीकरण को भारत भी करीब से देख रहा है। इस चुनाव परिणाम पर देश के प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर का भी रिएक्शन सामने आया है।
जावेद अख्तर ने क्या कहा?
उन्होंने जमात की हार पर खुशी जताते हुए ट्वीट लिखा, 'बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी, जो वहां की दक्षिणपंथी विचारधारा का मुख्य स्रोत है और देश में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचारों के लिए जिम्मेदार मानी जाती है, चुनावों में बुरी तरह हार गई है। इसका मतलब है कि अधिकांश बांग्लादेशी जनता जमात के अल्पसंख्यकों के प्रति सांप्रदायिक पूर्वाग्रह को स्वीकार नहीं करती. यह अच्छी खबर है।' बता दें कि दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी पार्टी को पाकिस्तान का करीबी भी बताया जाता है।
बीएनपी पार्टी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें
बीएनपी की स्थापना रहमान के पिता जियाउर रहमान ने की थी, जो एक सैन्य शासक से राजनीतिज्ञ बने थे। राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में हत्या कर दी गयी जिसके बाद लगभग चार दशकों तक पार्टी का नेतृत्व रहमान की मां खालिदा जिया ने किया।
पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने पर रहमान का भव्य स्वागत हुआ था, लेकिन उसके पांच दिन बाद ही रहमान को एक व्यक्तिगत त्रासदी का सामना करना पड़ा जब खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
रहमान अपनी मां की अनुपस्थिति में तब बीएनपी अध्यक्ष बने जब चुनाव से पहले पार्टी के सामने एक राजनीतिक खालीपन उत्पन्न हुआ। बदलते हालात ने उन्हें व्यक्तिगत क्षति के बीच कुछ निजी दिन बिताने का मौका नहीं दिया, क्योंकि घटनाएं इतनी तेजी से घटित हुईं कि उनके पास सोचने का समय भी नहीं था।
कौन हैं तारिक रहमान?
रहमान को व्यापक रूप से वंशवादी राजनीति की उपज माना जाता है, लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें एक विशेष प्रकार की सूझबूझ प्रदान की है।
उन्हें आम चुनाव से पहले जटिल परिस्थितियों में अपनी पार्टी को कुशलतापूर्वक संभालकर राजनीति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का श्रेय जाता है।
मृदुभाषी रहमान ने अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार का नेतृत्व करते हुए भारी भीड़ को आकर्षित किया।
रहमान ने भड़काऊ बयानबाजी से बचने और संयम एवं सुलह के आह्वान का रूख अपनाया, जबकि उनके परिवार और खुद उनके अपदस्थ अवामी लीग सरकार के साथ संबंध काफी कटु थे। अंततः बीएनपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और अब रहमान अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।
रहमान का जन्म 20 नवंबर, 1965 को ढाका में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को देखा। उन्हें अपनी मां और भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन 16 दिसंबर, 1971 को उन्हें रिहा कर दिया गया, जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली।
उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध का अध्ययन किया लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। बाद में उन्होंने कपड़ा और कृषि उत्पादों के व्यवसाय शुरू किए। वह 2009 में बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए और धीरे-धीरे पार्टी के पुनर्गठन में शामिल हो गए।
अवामी लीग के शासनकाल में रहमान भ्रष्टाचार और अपराध के कई मामलों के मुख्य निशाने पर आ गए। कुछ मामलों में उन्हें उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया।
वर्ष 2004 में हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में रहमान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस हमले में 24 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे। रहमान ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए इनका खंडन किया है। हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासनकाल में उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया था।
जब खालिदा जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया, तो रहमान को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नामित किया गया। उनकी मृत्यु के बाद, वह अध्यक्ष बन गए।
रहमान 2008 में यह कहते हुए विदेश चले गये कि उन्हें इलाज की जरूरत है। उससे पहले सैन्य समर्थित कार्यवाहक शासन के तहत उन्हें हिरासत से छोड़ा गया था।
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