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Balasore Train Accident: सीबीआई जांच के बाद जेई के फरार होने की उड़ी थी अफवाह, अब रेलवे ने जारी किया खंडन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 20, 2023, 01:06 PM IST

Balasore Train Accident: हादसे की जांच शुरू करने के बाद सीबीआई ने जेई से पूछताछ भी की थी, लेकिन इस पूछताछ के बाद से वह लापता है। अधिकारियों का कहना है कि जेई का पूरा परिवार फरार है, जिसके बाद उसका घर सील किया गया है।

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Odisha Train Mishap

Photo : ANI

Balasore Train Accident: ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे को लेकर मीडिया में चल रही एक खबर का रेलवे ने खंडन किया है। दरअसल, पहले सामने आया था कि इस मामले में सीबीआई की पूछताछ के बाद सोरो सिग्नल के जेई आमिर खान फरार हैं। हालांकि, रेलवे ने खंडन जारी कर इस खबर को झूठा बताया है।

दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से मंगलवार को जारी किए गए बयान में कहा गया है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में चल रहा है कि रेलवे के कर्मचारियों में से एक फरार है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाना है कि सभी कर्मचारी सीबीआई और सीआरएस जांच का हिस्सा हैं। रेलवे ने कहा कि कोई भी कर्मचारी लापता या फरार नहीं है।

घर सील करने की उड़ी थी खबरें

दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट में किया गया था कि बालासोर ट्रेन हादसे की जांच कर रही टीम ने कुछ समय पहले जेई आमिर खान से पूछताछ की थी। इसके बाद जब सोमवार को टीम दोबारा जेई के घर पहुंची तो घर में ताला पड़ा था। पूछताछ करने के बाद भी जेई के बारे में जानकारी नहीं मिली, जिसके बाद सीबीआई ने घर को सील कर दिया है। हालांकि, रेलवे ने इन खबरों का खंडन किया है।

292 लोगों की हुई थी मौत

ओडिशा के बालासोर में दो जून को बड़ा रेल हादसा हुआ था। इस रेल हादसे में 292 लोगों की जान चली गई थी और 900 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। रेलवे ने इस घटना के पीछे सिग्नल सिस्टम से छेड़छाड़ का अंदेशा जताया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। बता दें, बहानागा रेलवे स्टेशन से पहले एक मालगाड़ी से कोरोमंडल एक्सप्रेस टकरा गई थी, जिसके बाद ट्रेन के कुछ डिब्बे दूसरी पटरी पर गिर गए, और दूसरी तरफ से आ रही ट्रेन इससे टकरा गई, जिससे बड़ा हादसा हो गया।

सीबीआई ने छह जून को शुरू की थी जांच

इस मामले में सीबीआई ने छह जून को जांच शुरू कर एफआईआर दर्ज की थी। दरअसल, रेलवे ने इस हादसे के पीछे इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से छेड़छाड़ का अंदेशा जताया था, जिसके बाद जांच सीबीआई को ट्रांसफर की गई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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