महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर साल 2000 में हुए बाला साहेब ठाकरे की गिरफ्तारी का मुद्दा चर्चा में आ गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल ने पूर्व आईपीएस अधिकारी K P Raghuvanshi के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि ठाकरे को गिरफ्तार करने के लिए उन पर राजनीतिक दबाव बनाया गया था।
'छगन भुजबल ने बाला साहेब गिरफ्तार करवाया था'
दरअसल, रघुवंशी की हाल ही में जारी जीवनी में यह दावा किया गया कि उस समय भुजबल ने शिवसेना प्रमुख को गिरफ्तार करने के लिए दबाव डाला था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भुजबल ने कहा कि संबंधित “फाइल” उन्हें पुलिस विभाग की ओर से ही भेजी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया, “रघुवंशी बताएं कि वह फाइल मुझे किसने भेजी? जब पुलिस आयुक्त की ओर से फाइल आई, तो हम उसे वापस नहीं भेज सकते थे, क्योंकि हमने श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था।”
2000 में बाला साहेब को किया गया था गिरफ्तार
यह मामला 1993 के मुंबई दंगों से जुड़ा था। दिवंगत शिवसेना संस्थापक Bal Thackeray को 25 जुलाई 2000 को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित लेखों के जरिए दंगों के दौरान भड़काऊ लेखन किया।
भुजबल का दावा
भुजबल ने यह भी कहा कि उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी M N Singh से कहा था कि ठाकरे को जमानत मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि जमानत नहीं मिलती, तो ठाकरे के निवास ‘मातोश्री’ को ही अस्थायी जेल में तब्दील कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, ठाकरे को अदालत में पेश किए जाने के बाद मामला खारिज कर दिया गया और उन्हें राहत मिल गई। गौरतलब है कि उस समय यह गिरफ्तारी महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम मानी गई थी और आज, दो दशक बाद, इस पर फिर से सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
