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ज्यादा खून बहने की वजह से हुई बदलापुर कांड के आरोपी अक्षय शिंदे की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Akshay Shinde Encounter Case: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बदलापुर यौन शोषण के आरोपी अक्षय शिंदे की मौत ज्यादा खून बदने की वजह से हुई थी। बता दें, चर्चित बदलापुर यौन शोषण केस के आरोपी अक्षय शिंद को पुलिस ने सोमवार को एनकाउंटर में मार गिराया था।

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बदलापुर कांड का आरोपी अक्षय शिंदे।

Akshay Shinde Encounter Case: महाराष्ट्र में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बदलापुर कांड के आरोपी अक्षय शिंदे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि अक्षय शिंदे के सिर में गोली लगी थी और ज्यादा खून बहने की वजह से उसकी मौत हो गई थी। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि अक्षय शिंदे की मौत ब्लीडिंग का बड़ा कारण ज्यादा खून बहना था। बता दें, चर्चित बदलापुर यौन शोषण केस के आरोपी अक्षय शिंद को पुलिस ने सोमवार को एनकाउंटर में मार गिराया था।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती प्राथमिक रिपोर्ट मुंब्रा पुलिस को हैंड ओवर कर दी गई है। डॉक्टरों ने बताया कि अक्षय शिंदे का पोस्टमार्टम मंगलवार को हुआ, जो करीब सात घंटे तक चला इसकी वीडियोग्राफी भी की गई। 5 डॉक्टर्स के पैनल ने अक्षय शिंदे का पोस्टमार्टम किया। जानकारी के मुताबिक, बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी अक्षय शिंदे की बॉडी अभी तक ओवर नहीं की गई है। अक्षय शिंदे का शव कलवा के छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल के शवगृह में रखा जाएगा, परिवार के स्वीकार करने तक शव को शवगृह में रखा जाएगा

विपक्ष ने उठाए सवाल

राकांपा (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने अक्षय शिंदे की पुलिस हिरासत में मौत की परिस्थिति को लेकर महाराष्ट्र सरकार के बयान में विसंगतियों का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस आरोपी का चेहरा काले कपड़े से ढका हो और हाथों में हथकड़ी हो, वह चलते वाहन में किसी पुलिस वाले से पिस्तौल कैसे छीन सकता है। सुले ने बारामती में संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा, मैंने मांग की थी कि मुकदमा चलाने के बाद आरोपी को सार्वजनिक फांसी दी जाए जिससे समाज में कड़ा संदेश जाए। उधर एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि बदलापुर कांड के आरोपी अक्षय शिंदे ने पुलिस की गाड़ी में पिस्तौल छीनने के बाद कहा था कि वह किसी को नहीं छोड़ेगा। आरोपी पर गोली चलाने वाले पुलिस निरीक्षक संजय शिंदे ने कहा कि अक्षय के बर्ताव से लग रहा था कि वह सभी को मार देगा, इसलिए उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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