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आजम खान को बड़ी राहत, आचार संहिता उल्लंघन मामले में कोर्ट ने किया बरी

Azam Khan Acquitted News: यूपी की एक अदालत ने सपा नेता आजम खान को बड़ी राहत दी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है।

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आजम खान को कोर्ट ने किया बरी।

Photo : BCCL

Azam Khan Acquitted: समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान को बड़ी राहत मिली है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें आचार संहिता उल्लंघन के मामले में बरी कर दिया है। जेल में बंद आजम खान आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए थे। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्यों के अभाव में आजम खान को बरी कर दिया। यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है।

मिली जानकारी के मुताबिक, 2019 के चुनाव में एसडीएम पीपी तिवारी ने आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उन पर मतदान केंद्र तक अपनी कार ले जाने का आरोप था। एसडीएम के आदेश पर 24 अप्रैल, 2019 को आजम खान के खिलाफ थाना गंज में एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। जिस पर आज विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला सुनाया है।

बीते महीने डूंगरपुर केस में हुए थे बरी

इससे पहले आजम खान को एमपी-एमएलए कोर्ट ने डूंगरपुर केस में भी बरी कर दिया था। आजम खान के साथ इस ममाले में अन्य आरोपियों को भी अदालत ने बरी किया था। डूंगरपुर प्रकरण वर्ष 2016 का है, जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और आजम खान कैबिनेट मंत्री थे। आरोप था कि आजम खान के इशारे पर पुलिस और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने डूंगरपुर की बस्ती में आसरा आवास बनाने के लिए घरों को जबरन खाली कराया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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