Ram Mandir Trust SIT Investigation: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का प्रबंधन देखने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अब अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है।
ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, एसआईटी (SIT) अब पिछले दो वर्षों में मंदिर के बड़े धार्मिक आयोजनों पर खर्च किए गए ₹124 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि के ऑडिट और स्क्रूटनी में जुट गई है। इसमें जनवरी 2024 में हुआ ऐतिहासिक रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह भी शामिल है।
जांच के दायरे में ₹124 करोड़ के ये 3 बड़े आयोजन
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी वर्तमान में ट्रस्ट के सभी वित्तीय दस्तावेजों, ऑडिट रिपोर्ट, भुगतान वाउचर, बिल, व्यय विवरण (Expenditure Statements) और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह केवल खर्चों का एक नियमित ऑडिट है और टीम अभी तक किसी अंतिम वित्तीय अनियमितता के निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
जांच के दायरे में आए मुख्य आयोजन निम्नलिखित हैं:
1. रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह (2024)– ₹113 करोड़ का खर्च
SIT के रडार पर सबसे बड़ा खर्च 22 जनवरी 2024 को आयोजित हुआ प्राण प्रतिष्ठा समारोह है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित लगभग 8,000 अतिविशिष्ट अतिथि शामिल हुए थे। 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' द्वारा क्वोट ऑडिट रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस निम्नलिखित मदों के खर्चों की जांच कर रही है:
-टेंट सिटी और शेड्स: ₹35.97 करोड़
-अक्षत पूजन अभियान: ₹30.85 करोड़
-प्रचार और विज्ञापन (Publicity): ₹21.77 करोड़
-सजावट और लाइटिंग: ₹14.62 करोड़
-अन्न क्षेत्र (भोजन व्यवस्था): ₹5.11 करोड़
-धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड: ₹1.06 करोड़
-राग सेवा (भक्ति संगीत): ₹93 लाख
-साउंड सिस्टम: ₹68 लाख
-बिजली और मंडल पूजन: ₹43-43 लाख (प्रत्येक)
-विविध तैयारियां: ₹51 लाख
2. राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह (नवंबर 2025) – ₹10.12 करोड़
25 नवंबर 2025 को आयोजित राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह भी जांच के घेरे में है। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी सहित करीब 6,000 मेहमान शामिल हुए थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम इस बात का हिसाब लगा रही है कि विभिन्न मदों के तहत किया गया भुगतान ट्रस्ट के नियमों के अनुसार था या नहीं। रिकॉर्ड के अनुसार, इस वीआईपी इवेंट में प्रति अतिथि औसत खर्च लगभग ₹16,000 आया था।
3. अन्य उत्सव और महाकुंभ (2025)
प्रतिष्ठा द्वादशी (जनवरी 2025): इस उत्सव पर ₹83 लाख खर्च हुए थे, जिसमें से ₹52 लाख केवल लाइटिंग और डेकोरेशन पर खर्च किए गए।
महाकुंभ व्यवस्था (2025): महाकुंभ के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए ट्रस्ट ने ₹43 लाख खर्च किए, जिसकी फाइलें भी खंगाली जा रही हैं।
नकद ही नहीं, भक्तों के सोने-चांदी के चंदे का भी भौतिक सत्यापन
एसआईटी (SIT) की यह जांच केवल कागजी खर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि भक्तों द्वारा भगवान रामलला को चढ़ाए गए सोने और चांदी के आभूषणों और ईंटों के स्टॉक का भी वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
2024-2025 का दान: नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच भक्तों ने 2.3 किलोग्राम सोना और 83.3 किलोग्राम चांदी दान की थी।
महाकुंभ का दान: महाकुंभ मेले के दौरान मंदिर को अतिरिक्त 1.5 किलोग्राम सोना और 28 किलोग्राम चांदी प्राप्त हुई थी।
SIT की टीम इस कीमती सामान के इन्वेंट्री रिकॉर्ड, लॉकर/स्टोरेज की सुरक्षा और इसके वर्तमान स्टेटस का मिलान कर रही है।

राम मंदिर चंदा चोरी के बाद विवाद बढ़ा
आखिरकार क्यों बैठी SIT? क्या है मुख्य मामला?
यह पूरी जांच राम मंदिर के चंदे की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी और हेराफेरी से जुड़ी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि चंदा गिनने वाले कमरे (Counting Room) के अंदर कुछ कर्मचारी नकदी छिपाने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने में शामिल थे। इस दौरान सुपरविजन मैकेनिज्म (निगरानी) में भारी कमियां पाई गईं, जिसकी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी जा चुकी है। इसी कड़ी में अब यह देखा जा रहा है कि क्या दान में मिले पैसों का इस्तेमाल नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
काशी, मथुरा और वृंदावन से तुलना: वहां कैसे गिना जाता है चंदा?
इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े और प्रसिद्ध मंदिर ट्रस्टों के चंदा प्रबंधन प्रणाली पर भी ध्यान गया है, जहां बेहद स्वतंत्र और पारदर्शी प्रणालियां लागू हैं:
काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी): यहां 56 डोनेशन बॉक्स हैं, जिन्हें हफ्ते में दो बार सीधे सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) की देखरेख में खोला जाता है। वाराणसी के कमिश्नर एस. राजलिंगम के मुताबिक, पूरी गिनती सीसीटीवी की निगरानी में बैंक अधिकारियों और एक स्वतंत्र सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी (Retired Gazetted Officer) की मौजूदगी में होती है और सारा पैसा सीधे सरकारी खजाने में जाता है।
कृष्ण जन्मभूमि (मथुरा): संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के अनुसार, यहां सीसीटीवी कैमरों की चौबीस घंटे निगरानी में तीन स्थायी रसीद काउंटर संचालित होते हैं।
बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन): सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति, जिसके प्रमुख इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, चंदे की निगरानी करती है। महीने में एक बार एसडीएम की मौजूदगी में बक्से खुलते हैं।
अंतर: इन सभी प्रमुख मंदिरों में चंदे की गिनती और दस्तावेजीकरण की निगरानी एक बाहरी या न्यायिक प्राधिकरण (External Authority) करता है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट वर्तमान में अपनी आंतरिक व्यवस्था से काम कर रहा है।
क्या राम मंदिर ट्रस्ट को 'RTI एक्ट' के दायरे में आना चाहिए?
इन वित्तीय विवादों के बीच राजनीतिक गलियारों में राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। माकपा (CPI-M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्र सरकार इस मामले पर अपने रुख पर पुनर्विचार करे। उन्होंने 'X' (ट्विटर) पर पत्र साझा करते हुए तर्क दिया कि राम मंदिर ट्रस्ट को केवल 'स्वायत्त' (Autonomous) बताकर सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे से बाहर रखना सही नहीं है।
ब्रिटास ने दलील दी कि जिस ट्रस्ट का गठन सरकार द्वारा अनुमोदित योजना के तहत हुआ हो, जिसे संसद के कानून के तहत अधिग्रहित भूमि सौंपी गई हो और जिसके प्रशासनिक ढांचे में सेवारत आईएएस (IAS) अधिकारी शामिल हों, उसे आरटीआई के दायरे में आना ही चाहिए। उन्होंने कहा, 'जिस ट्रस्ट पर जनता का असीम विश्वास हो, उसे सार्वजनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को कायम रखना चाहिए।'
