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'शरीर का एक-एक कतरा देश के लिए...' जेल से आपके बेटे-भाई ने मैसेज भेजा है, जब पत्नी सुनीता ने पढ़ा अरविंद केजरीवाल का संदेश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 23, 2024, 01:16 PM IST

Sunita Kejriwal Video message: अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने एक वीडियो मैसेज पढ़कर सुनाया है। यह मैसेज अरविंद केजरीवाल की ओर से जेल से भेजा गया है। इस मैसेज को सुनीता केजरीवाल ने पढ़ते हुए कहा, मेरे प्यारे देशवासियों मुझे गिरफ्तार कर लिया गया है। मैं अंदर रहूं या बाहर, हर पल देश की सेवा करता रहूंगा। मेरे शरीर का एक-एक कतरा देश के लिए है।

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अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल

Photo : Twitter

Sunita Kejriwal Video message: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट ने केजरीवाल को छह दिन की ईडी की हिरासत में भी भेज दिया है। इसको लेकर आप कार्यकर्ता केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। इस बीच अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने एक वीडियो मैसेज पढ़कर सुनाया है। यह मैसेज अरविंद केजरीवाल की ओर से जेल से भेजा गया है।

इस मैसेज को सुनीता केजरीवाल ने पढ़ते हुए कहा, मेरे प्यारे देशवासियों मुझे गिरफ्तार कर लिया गया है। मैं अंदर रहूं या बाहर, हर पल देश की सेवा करता रहूंगा। मेरे शरीर का एक-एक कतरा देश के लिए है।

मेरा जीवन ही संघर्ष के लिए हुआ है

सुनीता केजरीवाल ने मैसेज पढ़ते हुए आगे कहा, इस पृथ्वी पर मेरा जीवन ही संघर्ष के लिए हुआ है। आज तक बहुत संघर्ष किए, आगे भी बढ़े-बढ़े संघर्ष कए हैं। इसलिए ये गिरफ्तारी मुझे अचंभित नहीं करती। आप सभी से मुझे बहुत प्यार मिला है। पिछले जन्म में मैंने जरूरी बहु पुण्य किए होंगे, जो मैं भारत जैसे महान देश में पैदा हुआ। हमें मिलकर भारत को फिर से महान बनाना है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली और नंबर वन देश बनाना है। देश के अंदर और बाहर ढेरों ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को कमजोर कर रही हैं। हमें सचेत रहकर इन शक्तियों को पहचानना है और हराना है। भारत में ही ढेरों ताकतें हैं, जो देशभक्त हैं और भारत को आगे बढ़ाना चाहती हैं। इन ताकतों के साथ जुड़ना है और इन्हें और मजबूत करना है।

ऐसी सलाखें नहीं बनीं जो मुझे कैद रख सकें

सुनीता केजरीवाल ने सीएम का संदेश पढ़ते हुए कहा, दिल्ली की मेरी मां-बहनें सोच रही होंगी कि केजरीवाल तो अंदर चला गया पता नहीं 1000 रुपये मिलेंगे या नहीं। ऐसी सलाखें नहीं बनीं जो आपके भाई और बेटे को अंदर रख सकें। मैं जल्द बाहर आऊंगा और अपना वादा पूरा करूंगा। क्या आज तक ऐसा हुआ कि केजरीवाल ने कोई वादा किया और वह पूरा नहीं हुआ, आपक भाई-बेटा लोहे का बना हुआ है। एक विनती है मंदिर जरूर जाना और भगवान से मेरे लिए आशीर्वाद मांगना।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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