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अब नीति आयोग की बैठक में भी नहीं जाएंगे अरविंद केजरीवाल, पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी; कहा- क्या मजाक है...

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 26, 2023, 04:00 PM IST

Arvind Kejriwal boycott NITI Ayog Meeting: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा, जब देश में खुलेआम संविधान और जनतंत्र की अवहेलना हो रही है और सहकारी संघवाद को मजाक बनाया जा रहा है तो फिर नीति आयोग की मीटिंग में शामिल होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

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Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal boycott NITI Ayog Meeting: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शक्तियों के बंटवारे को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच छिड़ा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र के अध्यादेश को कानूनी और सियासी मोर्चे पर चुनौती देने के लिए लगातार जमीन तैयार कर रहे हैं। अब लगता है कि उन्होंने केंद्र सरकार के किसी भी फैसले का विरोध करने का मन बना लिया है।

पहले केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने का ऐलान किया, और अब उन्होंने कल होने वाली नीति आयोग की बैठक का भी बहिष्कार किया है। केजरीवाल ने इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने लिखा है, जब देश में खुलेआम संविधान और जनतंत्र की अवहेलना हो रही है और सहकारी संघवाद को मजाक बनाया जा रहा है तो फिर नीति आयोग की मीटिंग में शामिल होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

पिछले सालों में जनतंत्र पर हमला हुआ

अरविंद केजरीवाल ने अपनी चिट्ठी में केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह जनतंत्र पर हमला हुआ है, गैर भाजपा सरकारों को गिराया जा रहा है, तोड़ा जा रहा है या काम नहीं करने दिया जा रहा, ये ना ही हमारे भारतवर्ष का विजन है और न ही सहकारी संघवाद। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों से देश भर में एक संदेश दिया जा रहा है- यदि किसी राज्य में लोगों ने गैर भाजपा पार्टी की सरकार बनाई तो उसे बर्ताश्त नहीं किया जा सकता है। केजरीवाल ने कहा, या तो गैर भाजपा सरकार को विधायक खरीद कर गिरा दिया जाता है। या ईडी और सीबीआई का डर दिखाकर विधायक तोड़े जाते ळैं और अगर किसी पार्टी के विधायक न बिके तो अध्यादेश या गवर्नर के जरिए उस सरकार को काम नहीं करने दिया जाता है।

मात्र आठ दिन में पलट दिया आदेश

केजरीवाल ने कहा, आठ साल की लड़ार्ठ के बाद दिल्ली वालों ने सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीती, दिल्ली वालों को न्याय मिला। मात्र आठ दिन में आपने अध्यादेश पारित करके सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलट दिया। उन्होंने कहा, आपके अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली ही नहीं, पूरे देश के लोगों में जबरदस्त विरोध है। सुप्रीम कोर्ट को न्याय का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। लोग पूछ रहे हैं- अगर प्रधानमंत्री जी सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मानते तो लोग न्याय के लिए फिर कहां जायेंगे। जब इस तरह खुलेआम संविधान और जनतंत्र की अवहेलना हो रही है और सहकारी संघवाद का मजाक बनाया जा रहा है तो फिर नीति आयोग की मीटिंग में शामिल होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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