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हरियाणा का रिजल्ट देख हिल गया केजरीवाल का कॉन्फिडेंस, बोले- 'चुनाव को हल्के में न लेना'

Arvind Kejriwal on Haryana Election Results: अरविंद केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज के चुनाव परिणामों से यह सबक मिला है कि ओवर कॉन्फिडेंस कभी अच्छा नहीं होता।

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अरविंद केजरीवाल।

Arvind Kejriwal on Haryana Election Results: हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे थे कि कोई भी सरकार आम आदमी पार्टी के बिना नहीं बनेगी। अपने इसी कॉन्फिडेंस के चलते उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया, यहां तक कि 90 की 90 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। मतगणना के बाद जब रिजल्ट आया तो आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के सभी दावे धरे के धरे रह गए। अभी तक के रुझानों में आम आदमी पार्टी 'जीरो' पर सिमटती दिख रही है।

इस बीच अरविंद केजरीवाल का बयान सामने आया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज के चुनाव परिणामों से यह सबक मिला है कि ओवर कॉन्फिडेंस कभी अच्छा नहीं होता। बता दें, हरियाणा में आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस को भी बड़ा झटका लगा है और पार्टी बहुमत से पिछड़ती दिख रही है।

क्या बोले अरविंद केजरीवाल?

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव नजदीक आ रहे हैं। चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज के चुनाव से सबसे बड़ी सीख यही है कि कभी भी अति आत्मविश्वास में नहीं रहना चाहिए। हर चुनाव, हर सीट मुश्किल होती है। हमें कड़ी मेहनत करनी चाहिए। किसी भी तरह की अंदरूनी लड़ाई नहीं होनी चाहिए। इस चुनाव में आपकी भूमिका सबसे अहम होगी, क्योंकि हम एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) में हैं। जनता को साफ-सफाई जैसी बुनियादी चीजों की अपेक्षा होती है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे-अपने क्षेत्रों में साफ-सफाई बनी रहे। अगर ऐसा किया गया तो हम निश्चित रूप से चुनाव जीतेंगे, हमारा मुख्य लक्ष्य चुनाव जीतना होना चाहिए।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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