फिर सुर्खियों में पवन जल्लाद, आजाद भारत में पहली महिला को फांसी देने की तैयारी में मथुरा जेल प्रशासन    

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 18, 2021, 02:43 PM IST

Shabnam Ali : अमरोहा की जेल में बंद शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14 अप्रैल 2008 की रात को अपने मां-बाप, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को कुल्हाड़ी से काट कर मार डाला था।

फिर सुर्खियों में पवन जल्लाद, आजाद भारत में पहली महिला को फांसी देने की तैयारी में मथुरा जेल प्रशासन    
Photo Credit: Times of India

मथुरा : पवन जल्लाद का नाम फिर सुर्खियों में है। निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फांसी पर झुलाने के बाद पवन मथुरा जेल जाकर अपनी अगली फांसी की तैयारियों का जायजा लिया है। दरअसल, पवन जिस महिला शबनम अली (38) को फांसी के फंदे पर चढ़ाएगा वह अपने परिवार के सात सदस्यों की निर्दयता पूर्वक हत्या करने की दोषी है। मथुरा जेल प्रशासन इस फांसी की तैयारी कर रहा है। शबनम आजाद भारत में फांसी पर झूलने वाली पहली महिला होगी। भारत में महिलाओं को फांसी की सजा मिलती रही है लेकिन उनकी यह सजा आजीवन कारावास में तब्दील होती गई है। पवन जल्लाद पिछले साल मथुरा जेल जाकर फांसी के तख्ते का जायजा ले चुका है। 

अमरोहा की जेल में बंद है शबनम
बता दें कि अमरोहा की जेल में बंद शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14 अप्रैल 2008 की रात को अपने मां-बाप, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को कुल्हाड़ी से काट कर मार डाला था। उसने इन सभी को दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश कर दिया था। मास्टर्स की दो डिग्रियां रखने वाली शबनम वारदात के समय 25 साली की थी और अपने प्रेमी सलीम से शादी करना चाहती थी। सलीम ने कक्षा छठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। शबनम का परिवार इस शादी के खिलाफ था। 

राष्ट्रपति खारिज कर चुके हैं दया याचिका
इस हत्याकांड में अमरोहा की सत्र अदालत ने साल 2010 में दोनों को फांसी की सजा सुनाई। पिछले 11 सालों में शबनम ने इहालाबाद हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उसकी फांसी की सजा कायम रही। राष्ट्रपति के समक्ष उसकी दया याचिका खारिज हो चुकी है। पिछले साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने उसकी समीक्षा याचिका भी खारिज कर दी। अब उसके पास राहत पाने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

फांसी के तख्ते का जायजा ले चुका है पवन जल्लाद
शबनम के वकील का कहना है कि दोषी के खिलाफ डेथ वारंट जारी हो रहा है, इस बारे में उन्हें सूचित नहीं किया गया है, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी है कि मथुरा जेल देश का ऐसा इकलौता कारागृह है जहां पर महिला कैदी को फांसी देने की व्यवस्था और यहां पर तैयारी जोरों पर चल रही है। मथुरा के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रे ने बुधवार को टीओआई से कहा, 'हमें कोई डेथ वारंट नहीं मिला है लेकिन हमने तैयारी शुरू कर दी है...पिछले साल फरवरी में पवन जल्लाद ने फांसी वाली जगह का जायजा लिया था। इस दौरान उसने बताया था कि फांसी के तख्ते में दिक्कत है। अब हम उसे ठीक कर रहे हैं। हमने बिहार की बक्सर जेल से फांसी देने में इस्तेमाल होने वाली दो रस्सी का ऑर्डर दिया है।' 

150 साल पहले हुआ था फांसी घर का निर्माण
मथुरा जेल में 150 साल पहले फांसी के तख्ते का निर्माण हुआ लेकिन तबसे इस तख्ते का इस्तेमाल नहीं हुआ है। 13 बच्चों को अगवा करने और इनमें से कम से कम पांच की हत्या करने की दोषी सौतेली बहनें रेणुका शिंदे और सीमा गावित फांसी पाने की कतार में हैं। इसके अलावा लखनऊ की महिला रामश्री को 1998 में फांसी की सजा हुई थी लेकिन जेल में बच्चे को जन्म देने के बाद उसकी सजा आजीवन कारावास में तब्दील हो गई। दशकों से इस फांसी घर का इस्तेमाल नहीं हुआ है, इसे व्यवस्थित करने में थोड़ा वक्त लगेगा। 
 

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