Delhi Riots : दिल्ली दंगा साजिश मामले में इशरत जहां को मिली बेल, उमर खालिद पर फैसला टला

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 14, 2022, 06:05 PM IST

दिल्ली दंगा साजिश मामले में कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां को जमानत मिल गई है जबकि जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की अर्जी पर फैसला टल गया है।

Delhi Riots : दिल्ली दंगा साजिश मामले में इशरत जहां को मिली बेल, उमर खालिद पर फैसला टला
Photo Credit: ANI

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को उमर खालिद की जमानत याचिका पर फैसला 21 मार्च के लिए टाल दिया। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 3 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा की साजिश के मामले में आरोपी हैं। उन्हें 13 सितंबर 2020 को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। उधर कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां को फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साजिश के मामले में जमानत दे दी। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने सुनाया।

इशरत जहां, कई अन्य लोगों के साथ, फरवरी 2020 के दंगों के "मास्टरमाइंड" होने के मामले में आतंकवाद विरोधी कानून-गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे। और 700 से अधिक घायल हुए थे। इससे पहले जहां को शादी करने के लिए जून 2020 में 10 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी और उन्हें सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने या गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने मामले को टाल दिया क्योंकि उमर खालिद की तरफ से बचाव पक्ष ने मामले में अपनी लिखित दलीलें दाखिल नहीं की थीं। एसपीपी अमित प्रसाद ने खंडन किया था कि साजिश के मामले में आरोपी के स्वस्थ आचरण को देखना होगा। कई चैट हैं और अन्य सबूत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री है।

उन्होंने अमरावती में उमर खालिद के भाषण पर अदालत द्वारा पूछे गए विशिष्ट प्रश्न पर प्रस्तुत किया कि इस कार्यक्रम की अनुमति 11 फरवरी 2020 को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अस्वीकार कर दी गई थी। 12 फरवरी को फिर से, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के एक पदाधिकारी द्वारा उमर खालिद को छोड़कर छह गणमान्य व्यक्तियों का उल्लेख करते हुए एक और आवेदन दायर किया गया था। आरोपी के पिता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। केवल छह लोगों को अनुमति दी गई, इसके बावजूद उमर खालिद ने वहां जाकर 17 फरवरी को भाषण दिया। इस संबंध में आदेश का पालन नहीं करने पर एफआईआर दर्ज की गई, एसपीपी ने तर्क दिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने आरोपी के वकील का खंडन करते हुए कहा कि वह आदेश और एफआईआर अवैध थे क्योंकि भाषण के अधिकार पर प्रतिबंध नहीं हो सकता। महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अमरावती मामले में दर्ज उक्त FIR में उमर खालिद को आरोपी बनाया गया था। भाषण के बाद कुछ नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष इसे आतंक का कृत्य नहीं कह सकता क्योंकि उसने वहां भाषण दिया था। अभियोजन पक्ष यूएपीए के अभियोजन का मजाक बना रहा है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जेएनयू मामले 2016 में दायर आरोपपत्र में खालिद को 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' टिप्पणी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था। लेकिन इस बार अभियोजन पक्ष ने इस टिप्पणी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी।
 खालिद सैफी, उमर खालिद, इशरत जहां, जेएनयू के छात्र नताशा नरवाल और देवांगना कलिता, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य पर भी कड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

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