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ओडिशा में सैन्य अधिकारी और महिला मित्र को लॉकअप में डाला, पुलिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप

Odisha News: पीड़ित महिला ने बताया कि वह अपने दोस्त (सैन्य अधिकारी) के साथ कुछ युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने भरतपुर थाने गई थी, जहां पर पुलिस न उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उल्टा उन लोगों को ही गिरफ्तार कर लिया।

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ओडिशा में थाने के अंदर सैन्य अधिकारी व महिला मित्र से दुर्व्यवहार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Photo : iStock

Odisha News: ओडिशा में सैना के अधिकारी और उसकी महिला मित्र के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस ने थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की और सैन्य अधिकारी की महिला मत्र के साथ यौन उत्पीड़न भी किया गया। मामला बीते रविवार का है। पीड़ित महिला ने बताया कि वह कुछ युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने भरतपुर थाने गई थी, जहां पर पुलिस न उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उल्टा उन लोगों को ही गिरफ्तार कर लिया।

रविवार रात को भरतपुर थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा गिरफ्तार की गई महिला को उच्च न्यायालय ने जमानत पर रिहा कर दिया। महिला ने बताया कि वह अपने दोस्त, सेना अधिकारी के साथ देर रात करीब एक बजे अपना रेस्तरां बंद कर घर लौट रही थी तभी कुछ युवकों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। इसके बाद वे मदद मांगने के लिए भरतपुर थाने गए।

मदद के बजाय किया गया उत्पीड़न

महिला ने आरोप लगाया, जब हम प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे तो वहां एक महिला सिपाही सादी वर्दी में थी। हमने उनसे प्राथमिकी दर्ज करने और बदमाशों को पकड़ने के लिए एक गश्ती वाहन भेजने के लिए कहा। मेरी मदद करने के बजाय, उसने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया। वर्तमान में भुवनेश्वर स्थित एम्स में इलाज करा रही महिला ने कहा कि कुछ देर बाद और पुलिसकर्मी थाने पहुंचे और उनके दोस्त से शिकायत लिखने को कहा। महिला ने आरोप लगाया, मुझे नहीं पता कि क्या हुआ, उन्होंने उसे (सैन्य अधिकारी) को हवालात में डाल दिया। जब मैंने अपनी आवाज तेज करते हुए कहा कि वे सेना के अधिकारी को हिरासत में नहीं रख सकते तो दो महिला अधिकारियों ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी।

छाती पर मारी गई बार लात

महिला ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की और जब महिला पुलिसकर्मियों ने उसकी गर्दन पकड़ने की कोशिश की तो उसने एक महिला पुलिसकर्मी के हाथ पर काट लिया। महिला ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसके हाथ और पैर बांधकर उसे एक कमरे में बैठा दिया। महिला के मुताबिक, कुछ समय बाद एक पुरुष अधिकारी ने दरवाजा खोला और मेरी छाती पर कई बार लात मारी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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