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सेना के हेलीकॉप्टर की खेत में हुई इमरजेंसी लैंडिंग; पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मच गया हड़कंप

Army Helicopter makes Emergency Landing: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर की खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। जिसके बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया। मंगलवार को निगरानी के बाद कैंप में लौटते समय हेलीकॉप्टर में यांत्रिक खराबी पाई गई, जिसके चलते इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

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यांत्रिक खराबी के चलते सेना के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग हुई।

West Bengal: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सेना के हेलीकॉप्टर की एक खेत में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर के करीब सिलीगुड़ी से सटे ठाकुरनगर, जबराविता, डाबग्राम 2 इलाके में एक निजी बंद मैदान में हेलीकॉप्टर को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। इसके बाद मैदान के आसपास स्थानीय लोगों की भीड़ जमा होने लगी। इस घटना से पूरे शहर में हड़कंप मच गया।

इमरजेंसी लैंडिंग की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

सेना के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट को सूचना दी गई। खबर मिलते ही एनजेपी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जाकर स्थानीय लोगों को नियंत्रित करना शुरू किया। हालांकि आपातकालीन लैंडिंग के कारण कोई नुकसान, चोट या मौत नहीं हुई। बाद में सेना के सूत्रों ने बताया कि हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल मुख्य रूप से हवाई निगरानी के लिए किया जाता है।

यांत्रिक खराबी के चलते हुई सेना के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग

आज (6 मई, 2025, मंगलवार) सुबह हेलीकॉप्टर सिलीगुड़ी से सटे शालुगारा सेना कैंप से रवाना हुआ था। निगरानी करने के बाद कैंप में लौटते समय पाया गया कि उसमें यांत्रिक खराबी है। इसी कारण उस मैदान में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। सूचना मिलते ही बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन के वायुसेना अधिकारी और शालूगढ़ आर्मी स्टेशन के अधिकारी और जवान मौके पर पहुंचे और हेलीकॉप्टर की मरम्मत शुरू कर दी।

हेलीकॉप्टर को जल्द ही मरम्मत कर वापस स्टेशन भेज दिया जाएगा। इस संबंध में पूर्वी कमान के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विंग कमांडर शंकर तिवारी ने कहा, 'कुछ यांत्रिक खराबी के कारण हेलीकॉप्टर को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। हालांकि, हेलीकॉप्टर भारतीय सेना का है। चिंता की कोई बात नहीं है।' हालांकि, पुलिस अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से कतराते रहे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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