स्वच्छ हवा में सांस लेना हर किसी का मौलिक अधिकार है। लेकिन इस समय दिल्ली और एनसीआर की हवा में प्रदूषण रूपी जहर घुला हुआ है। दिल्ली में एक्यूआई का स्तर 400 के पार है जो किस गंभीर श्रेणी में है। इसके साथ ही एनसीआर के दूसरे शहरों की तस्वीर कुछ ऐसी है। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, बुखार का ज्यादातर लोग सामना कर रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि हवा में रफ्तार ना होने की वजह से प्रदूषण के कण बैठ गए हैं। मंगलवार से हवा में कुछ रफ्तार आ सकती है और थोड़ी बहुत राहत मिल सकती है।
एक्यूआई स्तर गंभीर श्रेणी में
प्रदूषण की इस तस्वीर दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों से बात करने पर पता चला कि नाम और इलाके भले ही अलग हों। लेकिन तस्वीर कमोबेश एक जैसी ही है। आम तौर पर दिल्ली का रिज इलाका और विश्वविद्यालय वाला इलाका ज्यादा साफ सुथरा माना जाता है। लेकिन राजेंद्र नगर पूसा रोड की तस्वीर खराब है। राजेंद्र नगर के रहने वाले मनीष बताते हैं कि हालात यह है कि खुली जगहों पर जाने के बाद आंखों में जलन बढ़ जा रही है। खासतौर से ऐसे लोग जिन्हें अस्थमा की दिक्कत है वो बेहद परेशान हैं। कुछ इसी तरह की परेशानी कमलानगर के रहने वाले राजेश की है। राजेश कहते हैं कि दिवाली से पहले और दिवाली के बाद का उनका अनुभव यही है कि दिल्ली में ठंड के दिनों में रहने से बचा जाए। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन्सान कहां जाए।
ग्रेप थ्री सिस्टम लागू
दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बाद ग्रेप थ्री को लागू कर दिया गया है। इसके तहत कंस्ट्रक्शन के कामों पर रोक लगाई गई है। लेकिन हवा में प्रदूषण के कणों को दूर करने में कामयाबी नहीं मिल पा रही है। पेड़ों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। सार्वजनिक जगहों पर पानी का छिड़काव हो रहा है। कुछ सोसाइटी जेन सेट को पीएनजी के जरिए चला रही है। लेकिवन बड़े पैमाने पर प्रदूषण की तस्वीर एक जैसी ही है।
