Himachal Pradesh By-Election 2024: पूर्वकेंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर इन दिनों हिमाचल प्रदेश में पसीना बहा रहे हैं। वैसे तो इस पहाड़ी राज्य में भारी बारिश की वजह से मौसम का मिजाज नरम है लेकिन सियासी पारा चढ़ा हुआ है। ठाकुर हमीरपुर से सांसद हैं। राज्य में विधानसभा की तीन सीटों पर 10 जुलाई को मतदान होना है, इसके लिए वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं और लोगों से भाजपा के लिए वोट करने की अपील कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिन तीन सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे है उनमें से दो सीटें हमीरपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र में आती हैं।
हमीरपुर में दो सीटों पर उपचुनाव
ये दो सीटें देहरा और हमीरपुर हैं। हमीरपुर संसदीय सीट से ठाकुर लगातार 2008 से सांसद हैं। इससे पहले ठाकुर के पिता एवं राज्य के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल लगातार तीन बार इस सीट से सांसद रह चुके हैं। अपने संसदीय सीट की दोनों विधानसभा क्षेत्र में जीत दर्ज करना ठाकुर के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। तीसरी सीट जिस पर उपचुनाव होना है, वह नालागढ़ है जो कि शिमला लोकसभा संसदीय क्षेत्र में आती है। उपचुनाव में इन सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए ठाकुर लगातार चुनाव अभियानों में हिस्सा ले रहे हैं।
देहरा बनी हॉट सीट, चुनाव मैदान में सीएम सुक्खू की पत्नी
उपचुनावों के लिए सोमवार शाम को चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा। बताया जाता है कि ठाकुर चुनाव प्रचार की समाप्ति तक हमीरपुर में डटे रहेंगे। रविवार को उन्होंने हमीरपुर में करीब छह चुनाव कार्यक्रम को संबोधित किया। हमीरपुर सीट से भाजपा उम्मीदवार आशीष शर्मा के लिए वह सोमवार को एक बाइक रैली भी निकालेंगे। शनिवार को ठाकुर देहरा में थे। इस दिन उन्होंने कई रैलियां कीं और भाजपा प्रत्याशी होशियार सिंह चाम्बयाल के लिए प्रचार किया। हिमाचल प्रदेश की देहरा हॉट सीट बन गई है।
इस सीट से राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर पहली बार चुनाव मैदान में हैं। चुनाव में अपनी पत्नी को जीत दिलाने के लिए सुक्खू भी लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उपचुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाना सुक्खू के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है क्योंकि वह हमीरपुर जिले के नादौन से आते हैं। यही नहीं डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री सीट भी इसी जिले में आती है।
निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुईं सीटें
गौरतलब है कि ये तीन सीटें निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हो गई थीं। गत फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में इन विधायकों ने भाजपा उम्मीदवारों को वोट दिया था और फिर वे भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई। भाजपा को उम्मीद है कि उपचुनाव में वह तीनों सीटों पर जीत दर्ज करेगी जबकि कांग्रेस अपनी जीत का दावा कर रही है। इन तीन सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
