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एक और रेल हादसा: पश्चिम बंगाल के रंगपानी में पटरी से उतरी मालगाड़ी, रेल आवागमन ठप

Train Accident: देश में आए दिन रेल हादसे से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं, इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के रंगपानी में एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। जिसके चलते रेल परिचालन का कार्य ठप पड़ गया। एक दिन पहले ही झारखंड में मुंबई-हावड़ा मेल के 18 डिब्बे पटरी से उतर गई थी।

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पश्चिम बंगाल के रंगापानी में रेल हादसा।

Goods train derailed in West Bengal: पश्चिम बंगाल में एक और रेल हादसा हो गया है। जहां दार्जिलिंग जिले के रंगापानी में एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। जिसके चलते इस रूट पर रेल आवागमन बाधित हो गया है। एक दिन पहले ही राजस्थान और झारखंड से भी रेल हादसे की खबर आई थी। आए दिन हो रही रेल दुर्घटना ने सभी की चिंता बढ़ा दी है।

मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए

रंगापानी में हुए इस रेल हादसे को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक मालगाड़ी को दो डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है। बता दें, इसी रूट पर 17 जून को कंचनजंघा एक्सप्रेस से एक मालगाड़ी टकरा गई थी।

Train Accident in West Bengal

रंगापानी में मालगाड़ी पटरी से उतरी।

बूंदी में मालगाड़ी के तीन डिब्बे पटरी से उतरे

एक दिन पहले ही राजस्थान के बूंदी से ये खबर आई थी कि मालगाड़ी पटरी से उतर गई, जिसके चलते रेल यातायात प्रभावित हुआ है। यह मालगाड़ी कोटा से दिल्ली की ओर जा रही थी। डिब्बे पटरी से उतरने के कारण डाउन लाइन पर रेल यातायात बाधित हो गया। रेलवे अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।

मुंबई-हावड़ा मेल के 18 डिब्बे पटरी से उतरे

इसके अलावा मंगलवार को ही झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में मंगलवार तड़के मुंबई-हावड़ा मेल के कम से कम 18 डिब्बे पटरी से उतर जाने के कारण दो लोगों की मौत हो गई थी और 20 अन्य घायल हो गए। यह दुर्घटना तड़के पौने चार बजे दक्षिण-पूर्व रेलवे (एसईआर) के चक्रधरपुर मंडल के अंतर्गत जमशेदपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बड़ाबम्बू के पास हुई।

अधिकारी ने बताया था कि रेलवे ने झारखंड में ट्रेन दुर्घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

ममता ने की थी केंद्र सरकार की आलोचना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक के बाद एक हुईं कई ट्रेन दुर्घटनाओं को लेकर मंगलवार को ही केंद्र सरकार की आलोचना की थी और सवाल किया था कि क्या केंद्र की संवदेनहीनता का कोई अंत नहीं होगा। ममता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा कि यह कैसा शासन है क्योंकि ट्रेन दुर्घटनाएं आम हो गयी हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, 'एक और विनाशकारी रेल दुर्घटना। आज सुबह झारखंड के चक्रधरपुर डिवीजन में हावड़ा-मुंबई मेल पटरी से उतर गयी जिसके दुखद परिणामस्वरूप कई लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।' ममता ने कहा, 'मैं गंभीरता से पूछती हूं : क्या यह शासन है? लगभग हर हफ्ते दुःस्वप्नों का यह सिलसिला, रेल पटरियों पर मौतों और चोटों का यह अंतहीन सिलसिला: कब तक हम इसे सहन करेंगे? क्या भारत सरकार की संवेदनहीनता का कोई अंत नहीं होगा?'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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