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Explained: ''अमेरिका का ब्लेड तुम्हारे गले पर...'' , ईरान में 'तख्तापलट' की क्यों हो रही चर्चा? समझिए अंदरूनी सत्ता संघर्ष की कहानी

अमेरिका-ईरान में जारी तनाव के बीच ईरान में 'सॉफ्ट कू' की चर्चा तेज हो गई है। कट्टरपंथी गुट राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य नेताओं पर अमेरिका से समझौते के जरिए सत्ता पर नियंत्रण बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि तख्तापलट के अब तक कोई आधिकारिक सबूत सामने नहीं आए हैं।

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'सॉफ्ट कू' क्या है और ईरान में इसकी चर्चा क्यों?
Edited by: Pooja Kumari
Updated Jul 19, 2026, 14:45 IST

Iran Crisis Explained: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव चरम पर है। अमेरिकी सेना लगातार ईरान पर हमले कर रही है, तो वहीं ईरान भी पलटवार कर रहा है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के बीच अब ईरान के भीतर से भी सत्ता संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ कट्टरपंथी (Hardliners) गुटों का आरोप है कि देश की मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व टीम 'सॉफ्ट कू' (Soft Coup) यानी बिना सेना या खुले विद्रोह के धीरे-धीरे सत्ता अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रही है। यह आरोप विशेष रूप से उस समय तेज हुआ जब अमेरिका के साथ बातचीत और युद्धविराम जैसे फैसले लिए गए।

क्या होता है 'सॉफ्ट कू'?

आमतौर पर तख्तापलट (Coup) का मतलब सेना के जरिए सत्ता पर कब्जा करना होता है। लेकिन सॉफ्ट कू में संविधान को औपचारिक रूप से बदले बिना, संस्थाओं और निर्णय लेने की शक्ति पर धीरे-धीरे नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जाती है। ईरान के कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि यही प्रक्रिया उनके देश में चल रही है।

राष्ट्रपति पेजेशकियन पर क्यों उठ रहे सवाल?

राष्ट्रपति पेजेशकियन पर क्यों उठ रहे सवाल?

किस पर लगे हैं आरोप?

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर कट्टरपंथी गुटों ने आरोप लगाया है कि वे अमेरिका के साथ समझौते और युद्धकालीन फैसलों के जरिए सत्ता का केंद्र अपने हाथों में ले रहे हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मोजतबा खामेनेई का नाम क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते हाल के दिनों में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी सीमित रही है। इसी वजह से कट्टरपंथी गुटों का दावा है कि उनके नाम पर फैसले तो लिए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक नियंत्रण कुछ दूसरे नेताओं के हाथ में चला गया है। विश्लेषकों का मानना है कि उनकी अनुपस्थिति ने अफवाहों और राजनीतिक अटकलों को हवा दी है।

कट्टरपंथियों ने सरकार पर लगाए सत्ता कब्जाने के आरोप (File Photo))

कट्टरपंथियों ने सरकार पर लगाए सत्ता कब्जाने के आरोप (File Photo))

'गले पर चाकू' वाली धमकी क्या है?

तनाव उस समय और बढ़ गया जब सरकार समर्थक माने जाने वाले एक धार्मिक वक्ता मोहम्मद अली बख्शी ने राष्ट्रपति पेजेशकियन को सार्वजनिक मंच से चेतावनी दी कि यदि सर्वोच्च नेता की शर्तों का पालन नहीं हुआ तो "हम होंगे, तलवार होगी और आपका गला होगा"। इस बयान की व्यापक आलोचना हुई, लेकिन इससे ईरान की आंतरिक राजनीतिक खाई और गहरी दिखाई दी।

क्या वास्तव में तख्तापलट हो रहा है?

अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि ईरान में वास्तव में तख्तापलट हुआ है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच प्रभाव और नियंत्रण की लड़ाई है, जिसे कट्टरपंथी गुट 'सॉफ्ट कू' का नाम दे रहे हैं। यह अधिक राजनीतिक आरोप और आंतरिक शक्ति संघर्ष का संकेत है, न कि किसी स्थापित तख्तापलट का।

इसका अमेरिका-ईरान रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ईरान के भीतर यह खींचतान बढ़ती है, तो अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या युद्धविराम को लागू करना और कठिन हो सकता है। आंतरिक राजनीतिक विभाजन न केवल ईरान की घरेलू राजनीति बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यह लगातार सातवीं रात है जब अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शनिवार शाम (स्थानीय समयानुसार) ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर हमला किया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देना है।

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