Old pension scheme: पुरानी पेंशन योजना लागू करने को लेकर केंद्र सरकार की कर्मचारी यूनियन अब दो दो हाथ करने को तैयार हैं। इंडियन रेलवे की सबसे बड़ी कर्मचारी यूनियन ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के बुधवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर ऐलान किया की अगर सरकार के द्वारा गठित कमेटी का कोई नतीजा नहीं निकला तो रेलवे का चक्का जाम करने से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। दिल्ली के जंतर मंतर पर फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत के कहा की सरकार कर्मचारी की मांग को अगर गंभीरता से नहीं लेती है तो इसे राजनीतिक खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, फिलहाल पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए बनाई गई कमेटी के आगे संयुक्त केंद्रीय कर्मचारी यूनियन ने अपनी बात कही है और साफ किया है कि सुधार के नाम पर हमे इस बार कोई नया फॉर्मूला नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, हमारी मांग बल्कि पुरानी योजना फिर से लागू करे। इधर, दिल्ली के साथ ही हमलोग देशभर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे। साथ में बाकी जिन राज्यों में पुरानी पेंशन लागू नही हुआ है उनको भी साथ लेकर आने वाले संसद के सत्र में दिल्ली में एक बड़ा धरना देंगे।
छलावा साबित हुई एनपीएस
जंतर मंतर पर धरने में शामिल रेल कर्मचारियों एवं अन्य सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए जेएफआरओपीएस के संयोजक और एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि 2004 के बाद सरकारी सेवा में आये सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू एनपीएस एक छलावा साबित हुई है। जो भी कर्मचारी आज 18 साल से अधिक की सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे है और मिलने वाली पेंशन की रकम सरकारों के द्वारा मिलने वाली वृद्वावस्था पेंशन से भी कम है। ये उनके साथ भारी अन्याय है। सरकारी कर्मचारी 30 से 40 वर्ष तक देश के विभिन्न विभागों में सेवा देकर राष्ट्र की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं पर एनपीएस के तहत सेवानिवृत्ति पर उन्हें जो पेंशन मिलेगी वह उनकी समाजिक सुरक्षा के लिए मजाक हैं।
लोकसभा चुनावों में बनेगा बड़ा मुद्दा
गौरतलब है कि पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए सभी सरकारी संगठनो ने मिलकर जेएफआरओपीएस का गठन किया है, जिसके तहत 01-01-2004 के बाद भर्ती हुए सरकारी कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। बीते हिमाचल और कर्नाटक के चुनावों में ये एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा हैं। उनको उम्मीद है की आने वाले लोकसभा चुनावों में केंद्र पर दबाव बनाने का फायदा इनको मिलेगा।
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