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Parliament: 'वंदे मातरम् सिर्फ गाने के लिए नहीं, निभाने के लिए भी हो'; सपा सुप्रीमो ने 'दरारवादी' कह कसा सरकार पर तंज

सपा सांसद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम् कोई दिखावा, या राजनीति का विषय नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि वंदे मातरम् सत्तापक्ष का बनवाया हुआ है। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जो अब राष्ट्रवाद की बातें ज़ोर-शोर से करते हैं, उन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के लिए मुखबिरी का काम किया था।

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लोकसभा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को संसद में बोलते हुए सत्तारूढ़ भाजपा की कड़ी आलोचना की। संसद में 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा करते हुए सपा सुप्रीमो ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गाने के लिए नहीं, बल्कि निभाने के लिए भी होना चाहिए, लेकिन आज के 'दरारवादी’ लोग इसी के जरिये देश को तोड़ना चाहते हैं।

अखिलेश यादव बोले- अंग्रेज इस गीत से घबरा गए थे

सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा- जिस समय कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में रबिंद्र नाथ टैगोर जी ने ये गीत गाया लोगों के बीच तक ये गीत पहुंचा। ये नारा लोगों को जोड़ने का काम करता है। हमारा कोई भी स्वदेशी आंदोलन होता है, हम इसी नारे के साथ चले। आजादी के समय इस नारे से अंग्रेज घबराने लगे, वे लोगों पर देशद्रोह का कानून लगाने लगे। बच्चे ये गीत गाने लगे, तब भी अंग्रेजो ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। तब अंग्रेजों ने इसे बैन कर दिया, लेकिन हमारे क्रातिकारी माने नहीं, और इसे आगे बढ़ाते रहे। हमारे सत्तापक्ष के लोग हर चीज को अपना बना लेना चाहते हैं। बंकिम जी ने इतना महान गीत हमें दिया है।

'गीत की विरासत आज के राजनीतिक आख्यानों से कहीं ज्यादा बड़ी'

यादव ने कहा कि इस गीत की विरासत आज के राजनीतिक आख्यानों से कहीं ज़्यादा बड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम और भारत के लोगों का है, किसी राजनीतिक दल का नहीं। उन्होंने कहा कि आज सत्ताधारी दल के लोग हर चीज़ पर अपना दावा करना चाहते हैं। सत्ता पक्ष के लोग आकलन करें कि हम इसे कितना निभा रहे हैं। आज के ‘दरारवादी’ लोग उसी के जरिये देश को तोड़ना चाहते हैं। ऐसे लोगों ने पहले भी देश के साथ दगा किया है, आज भी दगा कर रहे हैं।

भाजपा में कितने समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष लोग बचे?

उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठन के समय उनके जो अध्यक्ष चुने गऐ थे, उन्हें जो भाषण देना था उस पर इस बात को लेकर बहस चली थी कि भाजपा धर्मनिरपेक्ष समाजवाद के रास्ते पर जाएगी कि नहीं।उन्होंने पूछा, "आज मुझे बताइए, भाजपा में कितने समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष लोग बचे हैं?

जो आजादी के आंदोलन में शामिल ही नहीं हुए वे क्या जानें इसका महत्व- अखिलेश

सपा सांसद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम् कोई दिखावा, या राजनीति का विषय नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि वंदे मातरम् सत्तापक्ष का बनवाया हुआ है। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जो अब राष्ट्रवाद की बातें ज़ोर-शोर से करते हैं, उन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के लिए मुखबिरी का काम किया था। उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी के आंदोलन में भाग ही नहीं लिया, वे वंदे मातरम् का महत्व क्या जानेंगे? सच्चाई यह है कि उन दिनों जो लोग सच्चे दिल से वंदे मातरम कहते थे, वे देशभक्त थे। दूसरी ओर, कुछ लोग अंग्रेजों के लिए जासूस और मुखबिर के रूप में काम करते थे। वे राष्ट्रवादी नहीं थे; वे राष्ट्र-विरोधी ताकतें थीं। सपा नेता ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि वे 'फूट डालो और राज करो' की पुरानी औपनिवेशिक नीति को आगे बढ़ा रहे हैं। आज भी कुछ लोग अंग्रेजों के उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

प्राथमिकी विद्यालयों को एकीकृत किए जाने के मुद्दे पर बोला हमला

उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्राथमिकी विद्यालयों को एकीकृत किये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम आजाद हैं, उस समय उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्कूल बंद किये जा रहे हैं। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश के 26 हजार से अधिक स्कूल बंद हो गए। जब पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज ने बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की, तो भाजपा सरकार ने पढ़ने गये बच्चों और पढ़ाने गए लोगों पर मुकदमा कर दिया।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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