Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद विमान हादसे में अपने बेटे कमलेश चौधरी को खोने वाले बनासकांठा निवासी सावदानभाई चौधरी के लिए पिछले एक साल में एक अनोखा रिश्ता सहारा बनकर उभरा है। यह रिश्ता उनके दिवंगत बेटे के पाकिस्तानी मित्र उमर अली के साथ जुड़ा है, जो आज भी परिवार से लगातार संपर्क में है। मूल रूप से बनासकांठा (Gujrat News) के रहने वाले कमलेश चौधरी पिछले कुछ समय से यूनाइटेड किंगडम (यूके) में नौकरी कर रहे थे।
3 जून 2025 को वह अपने घर बनासकांठा आए थे और करीब दस दिन परिवार के साथ बिताने के बाद अपनी पत्नी धापूबेन के साथ वापस यूके लौट रहे थे। इसी दौरान 12 जून को हुए विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। सावदानभाई बताते हैं कि यूके में कमलेश के साथ उमर अली नाम का एक पाकिस्तानी युवक काम करता था। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। वे साथ काम करते, साथ घूमते और ज्यादातर समय एक-दूसरे के साथ ही बिताते थे। उनकी मित्रता इतनी गहरी थी कि दोनों के परिवार भी एक-दूसरे को पहचानते थे।
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हर संभव मदद के लिए परिवार के साथ रहेगा खड़ा
हादसे की रात ही उमर अली का सावदानभाई को फोन आया। उसने कमलेश के बारे में पूछा और जब उसे हादसे की पूरी जानकारी मिली तो वह भी बेहद दुखी हो गया। उसने परिवार को भरोसा दिलाया कि वह हर संभव मदद के लिए उनके साथ खड़ा रहेगा। सावदानभाई के अनुसार, इसके बाद उमर अली ने नियमित रूप से फोन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह एक रोजाना की आदत बन गई। दोनों देशों के समय के अनुसार वह हर दिन दोपहर करीब तीन बजे फोन करता है।
कमलेश के नहीं रहने पर उमर निभा रहा परंपरा
सावदानभाई कहते हैं, "शुरुआत में उसकी आवाज में भी उतना ही दर्द था जितना हमारे परिवार में था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसके फोन हमारे जीवन का हिस्सा बन गए। आज वह परिवार के सदस्य जैसा बन गया है। रोज तीन बजे हम उसके फोन का इंतज़ार करते हैं।" परिवार का कहना है कि कमलेश जब भी यूके से घर आता था, तो अपने माता-पिता के लिए कपड़े, चॉकलेट और अन्य उपहार लेकर आता था। अब कमलेश तो नहीं रहा, लेकिन उमर अली उस परंपरा को निभा रहा है।
सावदानभाई बताते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति यूके से बनासकांठा आता है, उमर अली उसके हाथों परिवार के लिए कपड़े, जैकेट, चॉकलेट और अन्य उपहार भेजता रहता है। एक साल बाद भी कमलेश की कमी परिवार को हर पल महसूस होती है, लेकिन उनके पिता का कहना है कि उमर अली का साथ उन्हें यह एहसास दिलाता है कि इंसानियत और दोस्ती की कोई सरहद नहीं होती। कमलेश भले इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी दोस्ती आज भी दोनों परिवारों को जोड़े हुए है।
