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सूत्रों ने कहा कहा कि बदले में बाइडन प्रशासन अब अपने विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कांग्रेस को लागत और जरूरी जानकारी के साथ एलओए (प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र) के साथ एक-दो महीने के भीतर जवाब देगा। 31 ड्रोन - नौसेना के लिए 15 सी गार्डियन और सेना और भारतीय वायुसेना के लिए 16 स्काई गार्डियन की आखिरी डील व कीमत पर दोनों पक्षों द्वारा मुहर लगाई जाएगी। 15 जून को रक्षा मंत्रालय की शुरुआती मंजूरी में सौदे के लिए लगभग 3.1 बिलियन डॉलर की अनुमानित लागत तय की गई थी।
सूत्रों ने कहा, सशस्त्र बल अगले छह से सात वर्षों में सभी ड्रोनों को शामिल करने का काम पूरा करने के इच्छुक हैं, जिन्हें निर्माता जनरल एटॉमिक्स (जीए) द्वारा भारत में असेंबल किया जाएगा। चीन के पास मौजूद सशस्त्र ड्रोनों की तुलना में ये कहीं अधिक सक्षम हैं। चीन पाकिस्तान को काई होंग-4 और विंग लूंग-II ड्रोन की आपूर्ति भी कर रहा है। एमक्यू-9बी हिंद महासागर में भारत की लंबी दूरी की निगरानी और सटीक हमले की क्षमताओं में ताकत जोड़ देगा। एलओआर ड्रोन और उनके पेलोड के लिए तीनों सेनाओं की विशिष्ट जरूरतें पूरी होंगी, जिसमें नौसैनिकों को समुद्री गश्ती राडार से लैस करना भी शामिल है।
