Agniveer New Rules: अग्निपथ योजना के तहत भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे अग्निवीरों के लिए करियर आगे बढ़ाने का एक और रास्ता खुला है। अब शुरुआती चार साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित कैडर में चयनित नहीं होने वाले अग्निवीरों को दो साल के नए कार्यकाल का विकल्प मिलेगा। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्यकाल के बाद नियमित कैडर में शामिल होने के लिए 25% की कोई तय सीमा नहीं होगी। निर्धारित न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड पूरा करने वाले अग्निवीर नियमित कैडर में शामिल हो सकेंगे।
अग्निवीरों को 2 साल का अतिरिक्त मौका
5 नवंबर को गांधीनगर में हेडक्वार्टर साउथ वेस्टर्न एयर कमांड की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर वाइस मार्शल जी.एस. भुल्लर, वीएम (जी), सीनियर ऑफिसर इंचार्ज एडमिनिस्ट्रेशन ने अग्निपथ योजना के संशोधित ढांचे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से 25% का चयन मेरिट के आधार पर नियमित कैडर के लिए किया जाएगा। बाकी 75% अग्निवीर अपनी इच्छा के अनुसार दो साल के नए कार्यकाल के लिए आवेदन कर सकेंगे।
दूसरे दो साल के बाद परमानेंट भर्ती में 25% की सीमा नहीं
एयर वाइस मार्शल भुल्लर ने बताया कि दूसरे दो साल के कार्यकाल में नियमित कैडर में शामिल होने के लिए पहले जैसी 25% की सीमा लागू नहीं होगी। इसके लिए अग्निवीरों को अनुशासन, मेडिकल फिटनेस, काम के प्रदर्शन और अन्य निर्धारित न्यूनतम मानदंडों को पूरा करना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 100 अग्निवीरों में से 25 को पहले चरण में नियमित कैडर में जगह मिलती है और बाकी 75 दो साल के नए कार्यकाल के लिए तैयार होते हैं, तो दूसरे कार्यकाल के बाद न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड पूरा करने वाले सभी 75 अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया का विस्तृत तरीका और आवेदन संबंधी दिशा-निर्देश सरकार के आधिकारिक दस्तावेज मिलने के बाद स्पष्ट होंगे।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें- DRDO को मिली बड़ी कामयाबी, स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण
ऑपरेशन से लेकर रडार और एयर डिफेंस तक तैनात हैं अग्निवीर
भुल्लर ने बताया कि भारतीय वायुसेना में अग्निवीरों को केवल सामान्य या प्रशासनिक कामों तक सीमित नहीं रखा गया है। वे एयर डिफेंस, फाइटर ऑपरेशंस, हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस और रडार जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अलावा एयरमैन मेस, गार्ड रूम और अन्य प्रशासनिक कामों में भी उनकी भूमिका है। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों की ट्रेनिंग के मानकों में नियमित कैडर की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनका मोटिवेशन, काम का आउटपुट और प्रतिबद्धता भी नियमित एयरमैन के समान है। गुजरात और महाराष्ट्र के विभिन्न एयरफोर्स स्टेशनों के दौरे के दौरान स्टेशन कमांडरों और एयर ऑफिसर्स कमांडिंग से भी उन्हें अग्निवीरों के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक फीडबैक मिला है।
चार साल की सेवा के बाद दो साल का अतिरिक्त अवसर
एयर वाइस मार्शल ने कहा कि अग्निपथ योजना पिछले चार वर्षों के अनुभव और फीडबैक के आधार पर लगातार बेहतर की जा रही है। अलग-अलग सर्विस हेडक्वार्टर और स्टेशनों से मिले फीडबैक के आधार पर बदलाव किए गए हैं। उनका कहना था कि इस संशोधन से अग्निवीरों को अपनी क्षमता साबित करने के लिए दो साल का अतिरिक्त अवसर मिलेगा और वायुसेना को पहले से प्रशिक्षित तथा तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन का लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे अग्निवीरों और संगठन, दोनों के लिए फायदेमंद व्यवस्था बताया। उनके मुताबिक, अग्निवीरों को सेवा जारी रखने का विकल्प मिलेगा, जबकि वायुसेना को अनुभवी और प्रशिक्षित जवानों को नियमित कैडर में शामिल करने का अवसर मिलेगा।
