Shiv Sena UBT Rebel MPs: पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र में सियासी घमासान मचा हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) के दो तिहाई सांसदों ने बागी तेवर अपनाया हुआ है। पार्टी की गुरुवार को हुई संसदीय दल की बैठक में 9 में से महज तीन सांसद ही मौजूद रहे। जिसके बाद छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल होना लगभग तय हो गया।
क्या ऑपरेशन तुड़वा होगा शुरू?
उद्धव ठाकरे के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले संजय राउत ने दावा किया कि पार्टी के बागी सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये दिए गए और उन्हें राजस्थान में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हम ऑपरेशन तुड़वा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि बागी सांसदों में थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
उद्धव ठाकरे के साथ कौन-कौन
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। इस बैठक में पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद रहे। हालांकि, बागी तेवर अपनाने वाले सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे हैं।
बागी सांसदों ने की शिवसेना में विलय की मांग
सूत्रों ने बताया कि सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय को सत्यापन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत है और यह प्रक्रिया 'आगामी दिनों में' पूरी होने की संभावना है।
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बागी सांसदों को Y प्लस श्रेणी की सुरक्षा
महाराष्ट्र के गृह विभाग ने शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय पर आया जब धाराशिव निर्वाचन क्षेत्र के शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं ने चेताया कि पार्टी छोड़ने वालों के चेहरे पर गोबर पोता जाएगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी को धोखा देने वालों को धाराशिव में खुलेआम बाहर निकलने नहीं दिया जाएगा।
ऑपरेशन टाइगर ने मचाई खलबली
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में बागी गुट ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय की घोषणा की। देशभर की निगाहें तृणमूल की सियासी घटनाक्रमों पर टिकी हुई थीं, तभी अचानक महाराष्ट्र से ऑपरेशन टाइगर की खबरें सामने आने लगीं। हालांकि, शुरुआत में संजय राउत ने बगावत की खबरों को नजरअंदाज किया और कहा कि पार्टी एकजुट है। इसके बाद मातोश्री में सांसदों की एक बैठक भी हुई। जिसके कुछ सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहे।
