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'इस जगह पर पहले मंदिर था, देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद', अदीना मस्जिद मामले को लेकर कलकत्ता HC में हुई सुनवाई

Adina Masjid or Adinath Mandir: मालदा के पांडुआ स्थित अदीना मस्जिद (आदिनाथ मंदिर परिसर) विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने ASI पर धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया और स्थल को प्राचीन हिंदू मंदिर बताते हुए पूजा की अनुमति की मांग की। कोर्ट ने ASI से परिसर के धार्मिक चरित्र पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी तय की है।

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Adina Masjid or Adinath Mandir: मालदा जिले के पांडुआ स्थित अदीना मस्जिद (आदिनाथ मंदिर परिसर) से जुड़े विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई।(फोटो सोर्स: istock)

Photo : ANI

Adina Masjid or Adinath Mandir: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पांडुआ स्थित अदीना मस्जिद (आदिनाथ मंदिर परिसर) से जुड़े विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 फरवरी निर्धारित की है। कोर्ट ने इस दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उसने कभी अदीना मस्जिद या परिसर के धार्मिक चरित्र का औपचारिक निर्धारण किया है।

ASI द्वारा उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा: याचिकाकर्ता

यह मामला सनातन वैदिक धर्म के अनुयायियों और मूर्ति उपासकों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका के आधार पर कोर्ट के समक्ष आया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ASI द्वारा उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस परिसर को अदीना मस्जिद कहा जाता है, वह मूल रूप से प्राचीन श्री आदिनाथ मंदिर था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मंदिर परिसर में हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि मुस्लिम समुदाय को वहां नमाज अदा करने की छूट दी गई है, जो संविधान के तहत समान धार्मिक अधिकारों के सिद्धांत के खिलाफ है।

यह स्थल पहले एक हिंदू मंदिर था: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शोध और ऐतिहासिक साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि यह स्थल पहले एक हिंदू मंदिर था और आज भी वहां देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। ऐसे में हिंदू समुदाय को वहां पूजा करने का मौलिक अधिकार है, जबकि मंदिर परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 16 दिसंबर 2024 को केंद्र सरकार और ASI को पूजा की अनुमति देने के लिए प्रतिनिधित्व सौंपा गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए ASI से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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