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अब राजस्थान में अपना सियासी दमखम दिखाएगी AAP, कांग्रेस की बढ़ाएगी टेंशन?

  • Written by: संजीव कुमार दुबे
  • Updated Jan 6, 2023, 03:24 PM IST

राज्य में चुनावों की तैयारियों को लेकर गुरुवार को दिल्ली में आप के चुनावी रणनीतिकार संदीप पाठक की अगुवाई में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के राजस्थान इकाई के नेता एवं सदस्य शामिल हुए। बैठक में नेताओं से कहा गया कि वे चुनावी मोड में आ जाएं और राज्य में सियासी गतिविधियां तेज करें।

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राजस्थान में चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी।

Photo : PTI

गुजरात के बाद अब राजस्थान में आम आदमी पार्टी (AAP) अपना दमखम दिखाती नजर आएगी। केजरीवाल की पार्टी ने राज्य में विधानसभा की सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में राजस्थान चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई है। केजरीवाल की पार्टी ने चुनाव के लिए अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होंगे। राज्य में परंपरागत रूप से मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होता आया है। लेकिन इस बार आप की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा।

गुजरात में आप ने जीतीं 5 सीटें

गुजरात विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी पांच सीटें जीतने में सफल रही और उसे 13 फीसदी वोट मिले। जबकि 35 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही। गुजरात में अपने प्रदर्शन से आप उत्साहित है और वह राजस्थान में भी पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी में है। राजस्थान में अभी कांग्रेस की सरकार है। विपक्ष में भाजपा है। हाल के चुनाव में यह देखने में आया है कि जहां भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, वहां आप को फायदा पहुंचा है। दिल्ली, पंजाब और गुजरात से इसे समझा जा सकता है।

गुरुवार को दिल्ली में हुई अहम बैठक

राज्य में चुनावों की तैयारियों को लेकर गुरुवार को दिल्ली में आप के चुनावी रणनीतिकार संदीप पाठक की अगुवाई में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के राजस्थान इकाई के नेता एवं सदस्य शामिल हुए। बैठक में नेताओं से कहा गया कि वे चुनावी मोड में आ जाएं और राज्य में सियासी गतिविधियां तेज करें। राजस्थान में पार्टी के प्रभारी विनय मिश्रा भी इस बैठक में शामिल हुए। उन्होंने राज्य में पार्टी की ओर से किए गए कार्यों की समीक्षा की। मिश्रा ने आगामी चुनावों के मुद्देनजर आप की रणनीति पर लंबी चर्चा की।

200 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी AAP

रिपोर्टों के मुताबिक मिश्रा का कहना है कि राजस्थान से पार्टी के बारे में जो फीडबैक मिला है, वह उत्साहित करने वाला है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। हम अपनी सांगठनिक क्षमता को और मजबूत बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी।

कांग्रेस की बढ़ेंगी मुश्किलें

चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि राजस्थान में केजरीवाल की पार्टी यदि चुनाव लड़ती है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस पार्टी को होगा। क्योंकि मोटे तौर पर वह कांग्रेस के वोटों में ही सेंधमारी करती है। हाल के गुजरात चुनाव में भी यही देखने को मिला है। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच गतिरोध एवं टकराव पहले से चला आ रहा है। चुनाव के समय में कांग्रेस के इन दोनों दिग्गज नेताओं में टकराव यदि बढ़ेगा तो आप इसका भरपूर फायदा उठाने की कोशिश करेगी।

संजीव कुमार दुबे
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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