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'अग्निवीर के परिजनों को दिए गए 98.39 लाख...', राहुल गांधी के आरोपों पर सेना का जवाब

Agniveer Ajay Kumar News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि अग्निवीर अजय कुमार के परिजनों को मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया। इस पर सेना की ओर से जवाब दिया गया है कि अग्निवरी के परिवार को देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी।

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Rahul Gandhi on Agniveer scheme

Photo : Twitter

Agniveer Ajay Kumar: अग्निवीर अजय कुमार को लेकर राहुल गांधी के दावे पर भारतीय सेना ने जवाब दिया है। भारतीय सेना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीर अजय कुमार के परिजनों को मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया। सेना ने बुधवार को कहा है कि अग्निवरी के परिवार को देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी।

सेना की ओर से यह स्पष्टीकरण लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा एक्स पर अजय के पिता का एक वीडियो साझा करने के बाद आया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निवीर की मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक सहायता मिलने के बारे में संसद के भीतर झूठ बोला। राहुल गांधी ने कहा कि राजनाथ सिंह को संसद, देश और सेना से माफी मांगनी चाहिए।

लोकसभा में अग्निवीर योजना को लेकर उठाए थे सवाल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीते सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए अग्निवीर योजना को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि अग्निवीर को मोदी सरकार शहीद का दर्जा नहीं देती तथा उन्हें मुआवजा नहीं दिया जाता। इस पर रक्षा मंत्री सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया था और कहा था कि हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए या युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।

सेना की ओर से दिया गया जवाब

सेना के अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय (एडीजीपीआई) ने कहा कि भारतीय सेना अग्निवीर अजय कुमार द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है। एक शहीद नायक को मिलने वाले भत्ते का भुगतान अग्निवीरों सहित दिवंगत सैनिकों के निकटतम परिजनों को शीघ्रता से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट से पता चला है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीर कुमार के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया गया है। सेना ने पोस्ट में कहा, अग्निवीर अजय कुमार का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। कुल देय राशि में से अग्निवीर अजय के परिवार को पहले ही 98.39 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अग्निवीर योजना के प्रावधानों के अनुसार लागू लगभग 67 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और अन्य लाभ, पुलिस सत्यापन के बाद शीघ्र ही बाकी राशि का भुगतान किया जाएगा। इसने कहा कि कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी।

अग्निवीर के परिवार को इतना मिलेगा मुआवजा

रक्षा मंत्री कार्यालय ने बाद में एक्स पर पोस्ट किया। कहा गया कि भारतीय सेना अग्निवीरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों के अनुसार अजय कुमार के मामले में भुगतान की गई राशि में भारत सरकार से बीमा के रूप में 48 लाख रुपये, एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत वित्तीय संस्थानों से बीमा के रूप में 50 लाख रुपये और 39,000 रुपये की अतिरिक्त राशि शामिल है। उन्होंने कहा कि उचित प्रक्रिया के बाद शेष 67.3 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसमें 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि, आठ लाख रुपये की सेना कल्याण निधि, कार्यकाल पूरा होने तक शेष वेतन के लगभग 13 लाख रुपये और सेवा निधि के 2.3 लाख रुपये शामिल हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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